सत्य से साक्षात्कार कराती "भगवत गीता"

Aug 27 2015 04:19 PM
सत्य से साक्षात्कार कराती

गीता को  हिन्दु धर्म मे बहुत खास स्थान दिया गया है। गीता अपने अंदर भगवान कृष्ण के उपदेशों को समेटे हुए है। गीता को आम संस्कृत भाषा मे लिखा गया है, संस्कृत की आम जानकारी रखना वाला भी गीता को आसानी से पढ़ सकता है। गीता में चार योगों के बारे में विस्तार से बताया हुआ है,कर्म योग,भक्ति योग, राजा योग और जन योग। गीता को वेदों और उपनिषदों का सार माना जाता है,जो लोग वेदों को पूरा नही पढ़ सकते, सिर्फ गीता के पढऩे से भी आप को ज्ञान प्राप्ति हो सकती है।

गीता न सिर्फ जीवन का सही अर्थ समझाती है बल्कि परमात्मा के अनंत रुप से हमे रुबरु कराती है। इस संसारिक दुनिया मे दुख, क्रोध, अंहकार ईष्र्या आदि से पिडि़त आत्माओं को, गीता सत्य और आध्यात्म का मार्ग दिखाकर मोक्ष की प्राप्ति करवाती है। गीता मे लिखे उपदेश किसी एक मनुष्य विशेष या किसी खास धर्म के लिए नही है, इसके उपदेश तो पूरे जग के लिए है। जिसमे आध्यात्म और ईश्वर के बीच जो गहरा संबंध है उसके बारे मे विस्तार से लिखा गया है। गीता मे धीरज, संतोष, शांति, मोक्ष और सिद्धि को प्राप्त करने के बारे मे उपदेश दिया गया है। 

आज से हजारों साल पहले महाभारत के युद्ध मे जब अर्जुन अपने ही भाईयों के विरुद्ध लडऩे के विचार से कांपने लगते हैं, तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि यह संसार एक बहुत बड़ी युद्ध भूमि है, असली कुरुक्षेत्र तो तुम्हारे अंदर है। अज्ञानता या अविद्या धृतराष्ट्र है, और हर एक आत्मा अर्जुन है। और तुहारे अन्तरात्मा मे श्री कृष्ण का निवास है, जो इस रथ रुपी शरीर के सारथी है। इंद्रियां इस रथ के घोड़ें हैं। अंहकार, लोभ, द्वेष ही मनुष्य के शत्रु हैं। गीता हमे जीवन के शत्रुओं से लडऩा सीखाती है और ईश्वर से एक गहरा नाता जोडऩे मे भी मदद करती है। गीता त्याग, प्रेम और कर्तव्य का संदेश देती है। 

गीता मे कर्म को बहुत महत्व दिया गया है। मोक्ष उसी मनुष्य को प्राप्त होता है जो अपने सारे सांसारिक कामों को करता हुआ ईश्वर की आराधना करता है। अहंकार, ईष्र्या, लोभ आदि को त्याग कर मानवता को अपनाना ही गीता के उपदेशो का पालन करना है। गीता सिर्फ एक पुस्तक नही है, यह तो जीवन मृत्यु के दुर्लभ सत्य को अपने में समेटे हुए है। कृष्ण ने एक सच्चे मित्र और गुरु की तरह अर्जुन का न सिर्फ मार्गदर्शन किया बल्कि गीता का महान उपदेश भी दिया। उन्होंने अर्जुन को बताया कि इस संसार में हर मनुष्य के जन्म का कोई न कोई उद्देश्य होता है। मृत्यु पर शोक करना व्यर्थ है, यह तो एक अटल सत्य है जिसे टाला नही जा सकता। जो जन्म लेगा उसकी मृत्यु भी निश्चित है। जिस प्रकार हम पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्रों को धारण करते है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर के नष्ट होने पर नए शरीर को धारण करती है।