जानिए आखिर क्यों VIVO से हर साल BCCI को मिलते है 440 करोड़ रुपये

पिछले दिनों सीमा पर चीन के साथ चाहे कुछ भी हुआ हो, भले भारत सरकार ने चीन के 59 ऐप्‍स पर रोक लगा दी हो, लेकिन चीनी कंपनी वीवो (Vivo) इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल (IPL) के साथ जुड़ी रहेगी. यह अब करीब करीब साफ हो गया है. आईपीएल कब होगा, यह भले पता न हो, लेकिन अगर कुछ बड़ा उलटफेर न हुआ तो प्रायोजक वीवो ही होगा. भारतीय क्रिकेट बोर्ड यानी बीसीसीआई (BCCI) के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अगर करार खत्म करने के नियम से आईपीएल के टाइटल प्रायोजक वीवो को फायदा होता है तो फिर बीसीसीआई के इस चीनी मोबाइल कंपनी से नाता तोड़ने की संभावना नहीं है. बीसीसीआई ने पहले कहा था कि आईपीएल प्रायोजकों की समीक्षा की जाएगी. आईपीएल संचालन परिषद की बैठक में भाग लेने वाले बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा कि हमें अब भी टी20 विश्व कप, एशिया कप की स्थिति के बारे में पता नहीं है तो फिर हम बैठक कैसे कर सकते हैं. हमें प्रायोजन पर चर्चा करने की जरूरत है लेकिन हमने कभी रद या समाप्त करने जैसे शब्दों का उपयोग नहीं किया. अधिकरी ने कहा कि हमने कहा कि हम प्रायोजन की समीक्षा करेंगे. समीक्षा का मतलब है कि हम करार के सभी तौर तरीकों की जांच करेंगे. अगर करार खत्म करने का नियम वीवो के अधिक पक्ष में होता है तो फिर हमें 440 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के करार से क्यों हटना चाहिए? हम तभी इसे समाप्त करेंगे जब करार खत्म करने का नियम हमारे पक्ष में हो.

आपको बता दें कि पूर्वी लद्दाख में 15 जून को हुई हिंसक झड़प में भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे, इसके बाद केंद्र सरकार ने विवादास्पद टिकटॉक सहित चीन के 59 ऐप को प्रतिबंधित कर दिया है. इसको लेकर लगातार चर्चा हो रही है. इसी के बाद से वीवो आईपीएल भी चर्चा में आ गए थे. लेकिन बीसीसीआई इस बारे में क्‍या सोचा रहा है, चलिए इस पर भी नजर डालते हैं. अब पता चला है कि बीसीसीआई के कुछ पदाधिकारियों का विचार है जब तक वीवो मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए खुद पीछे नहीं हटता तब तक बोर्ड को अनुबंध का सम्मान करना चाहिए. यह करार 2022 में समाप्त होगा. करार को अचानक समाप्त करने पर बीसीसीआई को पर्याप्त मुआवजा देना पड़ सकता है.

इसके अलावा बीसीसीआई को कम समय में इतनी अधिक राशि का प्रायोजक मिलने की भी कोई गारंटी नहीं है क्योंकि विश्व अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह से प्रभावित है. हालांकि पेटीएम, जिसमें अलीबाबा एक निवेशक है या ड्रीम इलेवन, बाइजू स्विगी, जिनमें चीनी वीडियो गेम कंपनी टेनसेंट का निवेश है को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि वे भारतीय कंपनियां हैं. तो ये तो वह बात रही जो बीसीसीआई सोच रही है, लेकिन आज आपको यह भी जानना चाहिए कि आईपीएल की फ्रेंचाइजियों का इस मामले में क्‍या मानना है. इस पर खुले तौर पर किंग्‍स इलेवन पंजाब के मालिक नेस वाडिया सामने आए अपनी बात रखी. किंग्स इलेवन पंजाब की टीम के मालिक नेस वाडिया ने चीनी कंपनियों के प्रायोजन को खत्म करने की मांग कर दी है. नेस वाडिया ने कहा है कि हमें देश की खातिर आईपीएल में चीन के प्रायोजकों से नाता तोड़ना चाहिए. देश पहले है, पैसा बाद में आता है. यह इंडियन प्रीमियर लीग है, चीन प्रीमियर लीग नहीं. इसे उदाहरण पेश करना चाहिए रास्ता दिखाना चाहिए. नेस वाडिया ने कहा कि हां, शुरुआत में प्रायोजक ढूंढना मुश्किल होगा लेकिन मुझे लगता है कि पर्याप्त भारतीय प्रायोजक मौजूद हैं जो उनकी जगह ले सकते हैं. हमें देश सरकार का सम्मान करना चाहिए सबसे महत्वपूर्ण सैनिकों को जो हमारे लिए अपना जीवन जोखिम में डालते हैं. वहीं एक अन्य टीम के मालिक ने कहा कि सरकार को फैसला करने दीजिए, वे जो भी फैसला करेंगे हम उसे मानेंगे. वाडिया ने कहा कि इस विवादास्पद मामले में सरकार के निर्देशों का इंतजार करना सही नहीं है क्योंकि इस समय देश के साथ खड़े रहना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि अगर मैं बीसीसीआई अध्यक्ष होता तो मैं कहता कि आगामी सत्र के लिए मुझे भारतीय प्रायोजक चाहिए. वाडिया ने साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर चीन की ऐप को प्रतिबंधित करने के सरकार के फैसले का भी स्वागत किया.

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