बांग्लादेश में स्थित है माता के 5 शक्तिपीठ, कहीं गिरी थी हथेली तो कहीं नासिका

हर साल नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है माता के नौ स्वरूपों का इन दिनों में पूजन किया जाता है। हालाँकि मातारानी के 52 शक्तिपीठ भी हैं जहाँ माता के अंग, आभूषण गिरे थे। आज हम आपको उन्ही के बारे में बताने जा रहे हैं। आज हम बात करेंगे बांग्लादेश के शक्तिपीठ के बारे में। बांग्लादेश में चट्टल भवानी शक्तिपीठ स्थित है। कहा जाता है चट्टल भवानी शक्तिपीठ बांग्लादेश के चिट्टागौंग जिले में चंद्रनाथ पर्वत पर चट्टल भवानी शक्तिपीठ है। जी हाँ और कहते हैं यहां माता सती की दायीं भुजा गिरी थी।

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इसके अलावा यहीं पर सुगंधा शक्तिपीठ भी स्थित है। जी दरअसल बांग्लादेश के शिकारपुर से 20 किमी दूर माता की नासिका गिरी थी और यही बना सुगंधा शक्तिपीठ। इस शक्तिपीठ में माता को सुगंधा कहा जाता है और इस शक्तिपीठ का एक अन्य नाम उग्रतारा शक्तिपीठ है। इसके अलावा बांग्लादेश के सिलहट जिले में जयंती शक्तिपीठ स्थित है। कहा जाता है बांग्लादेश के सिलहट जिले में जयंतिया परगना में माता की बाईं जांघ गिरी थी। यहां माता देवी जयंती नाम से स्थापित हैं। इसके अलावा यही श्रीशैल महालक्ष्मी शक्तिपीठ भी स्थित है।

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जी दरअसल बांग्लादेश के सिलहट जिले में माता सती का गला गिला था और इस शक्तिपीठ में महालक्ष्मी स्वरूप की पूजा होती है। इसके अलावा यहीं पर यशोरेश्वरी माता शक्तिपीठ स्थित है। कहा जाता है बांग्लादेश के खुलना जिले में यशोर नाम की जगह है, जहां मां सती की बाईं हथेली गिरी थी। इस तरह से बांग्लादेश में माता के 5 शक्तिपीठ स्थित हैं, जिनका पूजन किया जाता है।

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