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बाबा की बूटी के आगे फेल हो रही मल्टीनेशनल्स की घुट्टी
बाबा की बूटी के आगे फेल हो रही मल्टीनेशनल्स की घुट्टी

आपने खाली बैठे कुछ लोगों को अपने नाखुनों को आपस में रगड़ते देखा होगा। जब उनसे पूछा जाता है तो वे कहते हैं यह तो बाल बढ़ाने का अचूक नुस्खा है। ऐसा नुस्खा आपने घने, काले, मुलायम बाल देने वाले हेयर आॅयल के विज्ञापनों में भी नहीं देखा होगा। अब तो घरों में महिलाऐं भी आपस में मिलने पर बतियाती हैं और साबुन, फेस वाॅश, नूडल्स, दलिया, बिस्कुट को लेकर चर्चा करती हैं ऐसे में बाबा रामदेव की बात निकल ही पड़ती है। योग गुरू के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले बाबा राम देव ने देश को स्वदेशी का ऐसा मंत्र दिया कि बाबा की बूटी के आगे मल्टीनेशनल्स की घुट्टी भी फेल हो गई।

भारतीय बाजार में गुणवत्ताहीन साबित हो जाने के बाद मैगी काफी पीछे छूट गई। ऐसे में बाबा रामदेव स्वदेशी का मंत्र ले आए और अपनी कड़छी से लोगों को आटा नूडल का प्रसाद देने लगे। स्वदेशी से बाबा ने मेक इन इंडिया का सफर सुलभता से तय किया है। दरअसल योग गुरू के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले बाबा राम देव ने योग को इतना लोकप्रिय बनाया कि जिम का शगल रखने वाले युवा तक सुबह 5 बजे उठकर बाबा रामदेव के शिविरों में जाने लगे। यही नहीं महिलाऐं, बच्चे और वृद्ध योग- आसन करने लगे।

आसनों के माध्यम से बाबा रामदेव ने लोगों को निरोगी बनाया और विश्व स्तर पर योग को पहुंचाया। इतना ही। आयुर्वेद की कड़वी जड़ी - बूटियों और कूटने - पीसने की जटिलताओं से उन्होंने लोगों को निजात दिलाते हुए आयुर्वेद और स्वदेशी की रिपेकेजिंग इस अंदाज़ में की कि आयुर्वेदिक मेडिसीन का एक बड़ा कारोबार ही खड़ा हो गया। इस कारोबार को विकसित करने के साथ ही उन्होंने स्वदेशी दवाओं की एक मांग पैदा की। जो लोग एलोपैथी की टेबलेट्स ले लेकर परेशान हो चुके थे।

चिकित्सकों के टेस्ट पर टेस्ट करवाने के बाद भी जिन्हें आराम नहीं हो रहा था उन्हें नए रैपर में सजी संजीवनी लुभाने लगी। इन दवाओं का असर भी अच्छा रहा। ऐसे में बाबा रामदेव आयुर्वेद की रिपैकेजिंग करने में सफल रहे। भारत की अतिप्राचीन धरोहर जो कि अब तक मंत्रों और वेदों में दबी छुपी पड़ी थी वह समाज के सामने आई। बाबा रामदेव की दवा कंपनी चलने के साथ अब तक अपने चिकित्सालयों में फुर्सत से बैठे आयुर्वेद चिकित्सकों को भी मरीज मिलने लगे।

स्वदेशी के जागरण के साथ ही देश में स्वदेशी आयुर्वेद दवा कंपनी का मार्केट बनने लगा। इस माध्यम से उन मल्टीनेशनल कंपनियों को आघात हुआ जो भारत को एक बड़े फार्मेसी मार्केट के तौर पर देख रही थीं। हालांकि आज भी रैनबैक्सी का अपना अलग मार्केट है लेकिन आयुर्वेद को आकर्षक रैपर्स, जड़ी बूटियों को कैप्सूल्स का स्वरूप देकर उन्होंने स्वदेशी दवाओं का अपना आकर्षण बिखेरा। फिर लोगों को जड़ी बूटियां पीसने, उकालने और पावडर या चूर्ण को शहद और चासनी में घोलकर सेवन करने की झंझट से मुक्ति भी मिल गई।

बाबा रामदेव के आयुर्वेद के इस अचूक नुस्खे से मेक इन इंडिया का सपना आगे बढ़ता गया तो कुछ लोगों को फार्मेसी कंपनियों की चिंता होने लगी। ऐसे में बाबा पर पशुओं की हड्डियों के उपयोग से दवाओं के निर्माण का आरोप लगाया दिया गया। बाबा की बूटी निःसंतान को संतान देने के लिए इजाद की गई तो कह दिया गया कि बाबा समाज में लिंग भेद को बढावा दे रहे हैं मगर इन सभी के बीच बाबा रामदेव अब किराना और खेल परिधान निर्माण के क्षेत्र में भी दाखिल हो गए। राजनीतिक बयानों केे लिए मशहूर बाबा ने आटा नूडल का आकर्षक पैक बाजार में उतारकर मैगी के अभाव को दूर कर दिया तो पतंजलि बिस्किट्स से लोगों को स्वाद के साथ सेहत की चिंता होने लगी।

अब तो बाबा ने लोगों को हैंड वाॅश करवाना तक सिखा दिया। ऐसे में भारत के एक योग गुरू द्वारा कंपनी स्थापित कर भारत में मेक इन इंडिया की शुरूआत की गई। बाबा राम देव के ये उत्पाद अब भारत में ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय हो रहे हैं। अब तो काॅस्मेटिक की दुनिया में भी बाबा रामदेव ने हलचल मचा दी है। काॅस्मेटिक के मार्केट में अभी से कंपनियों में हड़कंप मच गया है। बाबा की बूटी ने प्राकृतिक चिकित्सा और योग से शुरू किया अपने सफर की गाड़ी को मेक इन इंडिया के नए प्लेटफाॅर्म पर लाकर खड़ा किया है। इससे भारत के स्वदेशी जागरण अभियान को भी बल मिल रहा है। तो दूसरी ओर लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ी है। 

'लव गडकरी'

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