राजकोषीय घाटे को लेकर नहीं है कोई चिंता

नई दिल्ली : हाल ही में देश के केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजकोषीय घाटे को देखते हुए कहा है कि वे इसको लेकर चिंता नहीं कर रहे है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि सातवे वेतन आयोग को लागु किया जाना है और इसके लिए होने वाले खर्चों के बाद भी घाटे को सिमित रखने के लक्ष्य को हासिल कर लिया जाना है. उन्होंने सातवे वेतन को लेकर यह भी कहा है कि इसके लागु किये जाने के करीब 2 से 3 सालों तक सरकारी खजाने पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

क्योकि इसको चलाने के लिए हर वर्ष करीब 1.02 लाख करोड़ रु के अतिरिक्त खर्च की जरुरत है. आपको बता दे कि एचटी लीडरशिप सम्मेलन के दौरान वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को लेकर बातचीत में यह कहा कि मुझे घाटे को लेकर किसी भी तरह की खास चिंता नहीं है.

उनका कहना है कि सरकार के द्वारा राजकोषीय घाटे की गुणवत्ता को सुधारने का काम किया गया है और वह एक हद तक कामयाब भी रही है. साथ ही इस बात से भी अवगत करवा दे कि चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार ने राजकोषीय घाटे को GDP के 3.9 फीसदी, वर्ष 2016-17 में 3.5 फीसदी और वर्ष 2017-18 तक इसे 3 फीसदी तक सिमित करने का फैसला किया है.

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