अमेरिका ने पास किया ऐसा बिल जो अमेरिका और सउदी अरब के रिश्तों में लगा देगा सेंध

अमेरिका ने पास किया ऐसा बिल जो अमेरिका और सउदी अरब के रिश्तों में लगा देगा सेंध

वॉशिंगटन : 9/11 हमले के विक्टिम्स से जुड़ा एक अहम बिल अमेरिकी सीनेट में पास कर दिया गया है। अब हमले के पीड़ित मुआवजा के लिए सउदी अरब के खिलाफ केस कर सकेंगे। सउदी अरब इसी कारण हमेशा से इस बिल का विरोध करता रहा है। इस बिल का नाम द जस्टिस अगेंस्ट स्पॉन्सर्स ऑफ टेररिज्म एक्ट या जेएएसटीए रखा गया है।

अमेरिकी जांच एजेंसियों का मानना है कि 2001 में अलकायदा के आतंकी हमले में सऊदी अरब के लोगों का हाथ था। इसके बावजूद वहां की सरकार ने उन पर कार्रवाई नहीं किया। सउदी अरब 9/11 हमले की जिम्मेदारी से बचता रहा है। इस बिल के खिलाफ उसने अमेरिका को धमकी भी दी थी।

सउदी अरब ने कहा था कि यदि अमेरिका इस बिल को पास करता है, तो वो अमेरिका के 750 बिलियन डॉलर की संपत्ति को बेच देगा। हांलाकि अभी इस बिल को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से ग्रीन सिग्नल मिलना बाकी है। इसके वोटिंग के लिए फिलहाल तारीख तय नहीं की गई है।

इस कानून के बनने के बाद अमेरिका को पीड़ितों को मुआवजा नहीं देना होगा। पीड़ितों को मुआवजा सउदी सरकार देगी। दो प्रकार के लोग मुआवजा के लिए दावा कर सकेंगे। पहले वो जो इस दौरान घायल हुए थे और दूसरे वो जिनके सगे-संबंधियों की जानें गई थी।

सउदी अरब के लिए यह प्रतिष्ठा के साथ-साथ फाइनेंशियल स्तर पर भी बड़ा झटका होगा। डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर चार्ल्स शुमर इस बिल को पेश करने वालों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि सीनेट के सभी मेंबर्स इस बिल को पास करना चाहते थे। विक्टिम्स को इंसाफ मिलना चाहिए भले ही इसके लिए कोई देश जिम्मेदार क्यों न हो।

खास बात ये भी है कि इस मसले पर रिपब्लिकंस और डेमोक्रेट्स के बीच सहमति थी। इसके अलावा दोनों ही पार्टियों के सीनेटर ने इस बिल को पेश किया था। रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्नन ने कहा कि इस बिल को पास करने का मतलब यह नहीं है कि हम सऊदी अरब को टारगेट कर रहे हैं।

कहा जा रहा है कि ओबामा सरकार इस बिल के खिलाफ वीटो कर सकती है, क्यों कि बिल के पास होने के बाद अमेरिका और सउदी के बीच रिश्ते बिगड़ जाएंगे। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन में अलकायदा आतंकी ओसामा बिन लादेन ने हमला किया था, जिसमें 3000 लोगों की मौत हुई थी। 19 विमान हाइजैकरों में से 15 सउदी के थे।