अमावस्या पर सोमवती का दुर्लभ योग

श्राद्ध पक्ष में यूं तो हर बार अमावस्या की महत्वपूर्ण तिथि आती है लेकिन अमावस्या के इस योग के साथ ही यह क्षण बहुत ही दुर्लभ हो सकता है। जी हां, वर्ष 2028 में श्राद्धपक्ष की अमावस्या का दुर्लभ योग बनेगा। दरअसल 12 अक्टूबर को अमावस्या की तिथि होगी। यह अमावस्या सोमवार को होने से सोमवती कह लाएगी। पितरों के श्राद्ध कर्म के अनुसार यह तिथि बेहद महत्वपूर्ण होगी। इस दौरान यह बात भी सामने आई है कि जब भी अमावस्या हो वह शाम को होगी मगर इसका स्पर्श अलगे दिन भी रहेगा।

12 अक्टूबर को यह तिथि सूर्योदय से दूसरे दिन प्रातः 5.35 बजे और अगले दिन 24 घंटे से भी अधिक समय तक होगी। शास्त्रों के दौरान कहा गया है कि यह अमावस्या गायें दान करने के समान पुण्य प्रदान करती है। यही नहीं पितृपक्ष में यह दुर्लभ संयोग निर्मित हो रहा है। इस मामले में कहा गया है कि पं. कल्याणदत्त शास्त्री द्वारा कहा गया है कि पितरों की मृत्यु की तिथि यदि किसी को याद नहीं हो तो वह पितरों को इस अमावस्या पर तर्पण कर सकता है। इस तिथि में श्राद्ध करने के दौरान पुण्य लाभ प्राप्त होता है। सोमवती अमावस्या पर तीर्थों में स्नान करने और दान करने, दीप दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन ब्राह्मण को दक्षिणा, गरीब को भोजन आदि देने से पुण्यफल प्राप्त होता है। 

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