अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं तो जरूर सुने यह पावन कथा

Oct 21 2019 05:00 PM
अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं तो जरूर सुने यह पावन कथा

हर साल संतान के स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है और यह दीवाली के आरंभ होने का संकेत देता है. ऐसे में इस व्रत के करने से मां अहोई असीम कृपा बरसाती हैं और उनकी पूजा करने से बहुत लाभ होता है और संतान को कभी कोई कष्ट नहीं होता है. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस व्रत की कथा. आइए जानते हैं.

कथा - प्राचीन काल से एक सेठ की पत्नी चंद्रिका जो बहुत गुणवती थी, उसके कई संतानें थीं. वह सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही थी. एक बार उसने घर की लीपापोती के लिए कुदाल से मिट्टी खोदनी शुरू की. उस जगह पर सेह की मांद थी. अचानक कुदाल से एक सेह के बच्चे को चोट लगी तथा उसकी मृत्यु हो गई. इससे चंद्रिका को बहुत दुख हुआ. उसे इसका पश्चाताप हुआ पर फिर भी एक-एक करके उसकी संतानें मरने लगीं. सारी संतानों की अकाल मृत्यु से सारा परिवार परेशान रहने लगा और सोचने लगा कि उनसे कोई पाप हो गया है जिसका दंड सारे परिवार को मिल रहा है. एक शोक सभा में चंद्रिका ने विलाप करते हुए कहा कि जानबूझ कर उसने कोई पाप नहीं किया है तथा एक बार अचानक जब वह घर की लिपाई-पुताई कर रही थी तो उस समय कुदाल से मिट्टी उखाड़ते समय एक सेह के बच्चे की मृत्यु हो गई थी.तब वहां उपस्थित औरतों ने चंद्रिका को अहोई माता की पूजा के बारे में बतलाया.

चंद्रिका ने सेह एवं उसके बच्चे का चित्र बनाकर पूजा-अर्चना की तथा अहोई माता से क्षमा-याचना की. तब अहोई मां ने खुश होकर उसके बच्चों को दीर्घायु होने का वरदान दिया. तभी से अहोई मां के व्रत की परम्परा चल पड़ी. एक प्राचीन कथा के अनुसार दतिया नगर में चंद्रभान नाम का व्यक्ति रहता था. उसकी कई संतानें थीं परन्तु उनकी अल्प आयु में ही अकाल मृत्यु होने लगी किसी भी संतान के न बच पाने के कारण वह सब कुछ त्याग कर वन में चला गया तथा बद्रिकाश्रम के समीप बने कुंड के पास अन्न जल त्याग कर बैठ गया. 6 दिन वह इसी हालत में बैठा रहा. सातवें दिन आकाशवाणी हुई कि सेठ तुम्हें यह कष्ट पिछले जन्म के कर्मों के कारण मिल रहा है.

इन कष्टों के निवारण के लिए अहोई मां का व्रत करो, तब मां अहोई तुम से प्रसन्न होकर तुन्हें संतान सुख तथा दीर्घायु होने का वर देगी.उसके पश्चात उसने अपनी पत्नी सहित अहोई माता के विधिपूर्वक व्रत किए तथा अपने पापों की क्षमा याचना की. उसकी पूजा भक्ति तथा लग्र से प्रसन्न होकर अहोई मां ने उनके संतान होने एवं दीर्घायु होने का वरदान दिया. उसके पश्चात चंद्रभान के कई संतानें हुईं जो दीर्घायु रहीं.

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