नवजात शिशु की देखभाल और सावधानियाँ

प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों की देखभाल करना और सावधानियों का पालन करना बेहद ज़रूरी है | शिशु के माँ के गर्भाशय से बाहर आने के बाद अतिरिक्त सावधानियों का पालन करना पड़ता है| कई बार सेवा और सावधानी के अलावा भी नवजात शिशु कई तरह की बिमारियों के शिकार हो जाते हैं, ऐसे में जानकारियां के अलावा तत्परता और समय पर बीमारियों के लक्षण पहचान लेना ही माँ और शिशुकी जान बचा सकती है |

आइये जाने नवजात शिशु के देखभाल संबंधी कुछ आवश्यक बातें 

1 नवजात शिशु कई तरह की बिमारियों के शिकार हो जाते हैं। पचास प्रतिशत से अधिक नवजात शिशु पहले हफ्ते में ही निओनेटल जॉन्डिस के शिकार होते हैं।अतएव इस विषय में सचेत रहे |नवजात शिशु की आँखों और त्वचा को देखकर आप पता लगा सकते हैं कि उसे जॉन्डिस है या नहीं। अगर नवजात शिशु को जॉन्डिस है तो डॉक्टर को तुरंत सूचित करे|

2 नवजात शिशु में हेमोलीटिक बिमारी होती है तो बच्चे का खून माँ के खून का विरोधी होता है। चूँकि उनका ब्लड टाइप काफी अलग होता है, माँ से एंटीबाडी प्लेसेंटा को छेद कर नवजात के रेड ब्लड सेल पर अटैक कर सकता है और उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। अतएव सावधानियां और बच्चे की चिकित्सकीय देख रेख करते रहे |

3 नवजात बच्चे जब रोते है तो माता पिता बच्चों का रोना बंद करने के लिए उन्हें जोर जोर से झुलाते हैं, जो की बहुत खतरनाक हो सकता है , माता पिता हो ये समझना चाहिये की नवजात शिशु बेहद नाज़ुक होते है जोर से हिलाने डुलाने पर शिशु के आतंरिक अंगों पर दबाब पड़ नुक्सान पहुँच सकता है.

4 कई माताऐ शिशु को आवश्यकता से अधिक दूध पिला देती है जिससे शिशु को पाचन संबंधी परेशानी हो जाती है. शिशु को स्तनपान धीरे धीरे आवश्यकता अनुरूप और भूख लगने पर समय समय पर करते रहे |

6 कई बार माएं दूध की बोतल बच्चे के मुंह में ही भूल जाती है तथा बच्चा उसे मुंह में लेकर ही सो जाता है। इससे अनजाने में ही दूध के कारण बच्चे का दम घुट सकता है।

7 विशेषज्ञ कहते हैं कि 6 महीने से कम आयु के शिशुओं को पानी की कम मात्रा ही देनी चाहिए, उनका शरीर पानी पचाने लायक नही होता वे माँ के दूध से पर्याप्त पानी ले लेते है, फिर उन्हें बहार का केवल नाम मात्र का पानी चाहिये होता है|

8 बच्चों को पीठ के बल ही सुलाये, पेट के बल न सुलाएं क्योंकि ऐसा करने से उनके शरीर के वायुमार्ग बाधित हो सकते हैं जो जानलेवा तक हो सकता है।

9 नवजात शिशु को तकिया देने से पूर्व चिकित्सक से सलाह ले , प्रारंभिक महीनों में बच्चों को सुलाते समय तकिया नहीं रखना चाहिए क्योंकि उनकी गर्दन तथा रीढ़ की हड्डी नाज़ुक होती है तथा ऊंचाई मिलने के कारण श्वसन नलिकाओं में रूकावट आ सकती है।

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