यहाँ कटकर गिरी थी मातारानी की ऊपरी दाढ़ तो यहाँ गिरी थी माँ की नाभि

नवरात्रि के पर्व के दौरान माता के नौ रूपों का पूजन किया जाता है। ऐसे में आज हम आपको माता के शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं। माता रानी के 52 शक्तिपीठ है और इन शक्तिपीठों में शामिल है शुची नारायणी शक्तिपीठ। जी हाँ, 51 शक्तिपीठों में से एक शुची- नारायणी शक्तिपीठ कन्याकुमारी-तिरुअनंतपुरम मार्ग पर स्थित है और इसे शुचीतीर्थम शिव मंदिर कहा जाता है। जी हाँ और इसी को शुची नारायणी शक्तिपीठ कहते हैं। आपको बता दें कि अगर आप रेल मार्ग से यात्रा करना चाहते हैं तो कन्याकुमारी -दिल्ली मुंबई, चेन्नई, मदुरै, जम्मू, तिरुअनंतपुरम व एर्नाकुलम से जुड़ा हुआ है। तिरुअनंतपुरम से कन्याकुमारी ढाई घंटे की दूरी पर है।

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इसके अलावा अगर आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं तो निकटतम हवाई अड्डा तिरुअनंतपुरम में है। जहां से कन्याकुमारी 105 किलोमीटर की दूरी पर है। इसी के साथ अगर आप रोड मार्ग से जाना चाहते हैं तो नियमित बसें तिरुअनंतपुरम से कन्याकुमारी के लिए चलती हैं। आपको बता दें कि शुची नारायणी शक्तिपीठ के भैरव संकूर हैं और शक्ति नारायणी। कहा जाता है यहां माता की ऊपरी दाढ़ गिरी थी और यही माता को नारायणी नाम मिला है। यहाँ माता रानी सभी की इच्छा को पूरा करने वाली मानी जाती है। माता अपने वरदान से हर भक्त की मुराद को सफल बनाने में योगदान देती हैं।

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वहीं इसके अलावा विमला देवी शक्तिपीठ है जो उड़ीसा के उत्कल में देवी की नाभि गिरी थी। कहा जाता है यहां माता विमला नाम से जानी जाती हैं। जी हाँ और यहाँ हर साल भक्तों का बड़ा जमावड़ा आता है और माता के दर्शन कर उनका पूजन करता है।

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