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ओमान में 'नरक' भोग रहीं थी 24 पंजाबी महिलाएं, वापस लाया गया भारत, महिलाओं ने सुनाई दर्दभरी दास्तां
ओमान में 'नरक' भोग रहीं थी 24 पंजाबी महिलाएं, वापस लाया गया भारत, महिलाओं ने सुनाई दर्दभरी दास्तां

नई दिल्ली: ढेर सारी उम्मीदें और सपने संजोकर लोग अपना वतन और घर-बार छोड़कर नौकरी, बिजनेस या काम के सिलसिले में परदेस जाते हैं और इनमे से कई वहीं अपना ठिकाना बना लेते हैं. भारत से बड़ी तादाद में लोग विभिन्न विदेशी मुल्कों में जाकर रहते हैं. लेकिन, ऐसे बहुत सारे ठग हैं, जो बड़े-बड़े सपने दिखाकर लोगों को बातों में फंसा लेते हैं, उनसे मोटी रकम वसूलते हैं. इसके बाद जब लोग एक बार विदेश पहुंच जाते और वहां पर समस्याओं में घिर जाते हैं, तो एजेंट लोग पल्ला झाड़ लेते हैं. पंजाब की 38 महिलाएं ऐसे ही ओमान में कई तरह की मुसीबतों में फंस गई थीं, जिनमे से 24 को बड़ी मुश्किल से स्वदेश वापस लाया गया है. इन महिलाओं ने जो दास्तां सुनाई हैं, वो असहनीय है.

रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब की 38 में से 24 महिलाओं को खाड़ी मुल्कों (Gulf Countries) से वापस लाया गया है. ये सिख महिलाएं मोगा, फिरोजपुर और होशियारपुर जिलों की निवासी हैं. मोगा जिले की 41 वर्षीय महिला को ओमान से रेस्क्यू किया गया है. वो 17 मई को अपने परिवार से वापस मिलीं. जब वो घर पहुंची, तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. वो रो भी रहीं थीं और मुस्करा भी रहीं थीं. 2021 दिसंबर को एक महिला ट्रैवल एजेंट ने उनके साथ धोखा किया. महिला का सौदा 3 लाख में एक ओमान नागरिक से कर दिया गया था. सीधे शब्दों में कहें तो, महिला की तस्करी की गई थी. इस महिला का एक नौ वर्ष का बेटा भी है. वो अपने परिवार की आर्थिक रूप से सहायता करने के लिए ओमान जाने को मान गईं. 

दरअसल, उनके पति टैक्सी चलाते थे और कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में कैब चलना बंद हो गई. इससे घर का गुजारा बेहद कठिन हो गया था. इसी वजह से महिला ने ओमान जाकर पैसा कमाने का फैसला लिया. महिला ने कहा कि वो सिंगापुर जाना चाहती थी. मगर, ट्रैवल एजेंट ने कहा कि वहां पर कोई जॉब नहीं है. कोरोना के बाद सिंगापुर की स्थिति सही नहीं है. ऐसा करो कि आप ओमान चले जाओ. वहां पर आपको आराम से काम मिल जाएगा. हम आपकी नौकरी लगवा देंगे. इसके बाद एजेंट ने महिला को ओमान में ही एक भारतवासी के घर पर नौकरी करने को भेज दिया गया. उसने महिला को 24000 रुपये प्रति माह देने का वादा किया. महिला ने बताया कि पहले तो मैं हिचकिचाई, मगर फिर परिवार की स्थिति के आगे मैं हार मान गई.

पंजाबी महिला सिर्फ पांचवी तक ही पढ़ी थी. महिला के पति ने किसी प्रकार 70,000 रुपये का जुगाड़ किया. महिला 13 दिसंबर 2021 को टूरिस्ट वीजा पर ओमान पहुंची. मस्कट पहुंचते ही महिला को एक दफ्तर ले जाया गया. जहां उसे एक दीप नामक एक भारतीय शख्स मिला.   वहां 7 महिलाएं और भी थीं. कुछ दिन बीत जाने के बाद से ओमानी लोग उस दफ्तर आए. वो सभी महिलाओं से मिलने आए थे. महिला को 16 जनवरी 2022 से दो वर्षों के लिए वर्क वीजा दिया गया था. महिला को नियम और शर्तों का कुछ पता नहीं था. ओमान में उसे एक बड़े से घर में भेज दिया गया और कहा गया कि सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक वहां पर ही काम करना है. यहाँ महिला से दिनभर काम करवाया जाता था, जिससे कुछ दिन बाद महिला की स्थिति दयनीय हो चुकी थी और उसने काम करने से इंकार कर दिया. 

इसके बाद उसे ट्रैवल एजेंट के दफ्तर लाया गया और उसे वहां पर कैद कर दिया गया. महिला को पता चला कि दीप ने उसे 3 लाख में बेच दिया था. एजेंट के लोगों ने महिला को कैद करके मारा पीटा. वो बार-बार उसे करने को कह रहे थे. लेकिन, वो अपने देश लौटना चाहती थी. ट्रैवल एजेंट ने कहा कि वो उनके 3 लाख रुपये दे. इसके लिए महिला को फोन से बात करने की इजाजत दी गई. बता दें कि, मस्कट पहुंचने के बाद ही महिला का पासपोर्ट उससे छीन लिया गया था. उसके फोन के सभी कॉल रिकॉर्ड्स किए गए. महिला ने बताया कि उसने शहर के एक गुरुद्वारे के संबंध में सुन रखा था. महिला ने कहा कि वो काम करने को तैयार है. इसके बाद उसको रिहा कर दिया गया. महिला भागकर गुरुद्वारे पहुंच गई.

इसके बाद महिला कुछ अच्छे लोगों के संपर्क में आई. जिन्होंने उसकी सहायता की. उसकी बात भारतीय अथॉरिटी तक जानकारी भेजी गई. विश्व पंजाबी संगठन (WPO) के प्रमुख साहनी ने उनकी भी वैसे ही सहायता की, जैसे वो अब तक एक पखवाड़े में ओमान से 24 पंजाबी महिलाओं को रेस्क्यू कर चुके थे. लंबी प्रक्रिया के बाद पंजाब सरकार तक पहुंचे. फिरोजपुर पुलिस अधीक्षक रणधीर कुमार के नेतृत्व में SIT गठित की गई. महिला की शिकायतों के आधार पर 3 एजेंटों को गिरफ्तार किया गया. इन एजेंटों के मुख्य गुर्गे दिल्ली, तेलंगाना और पंजाब में इसी तरह गरीब महिलाओं को अपने जाल में फंसाते हैं और फिर खाड़ी देशों में बेच देते हैं.  भारतीय दूतावास और ओमान सरकार के समन्वय से राज्यसभा सांसद विक्रम साहनी के प्रयासों से पहचान की गई 34 महिलाओं में से 15 को उनके परिवारों के साथ फिर से मिला दिया गया है.

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