हॉस्पिटल में बच्चों की मौत पर बोले गेहलोत, कहा- कोई नई बात नहीं...

जयपुर: हाल ही में राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन सरकारी अस्पताल में एक महीने के अंदर 77 नवजात शिशुओं की मौत हो गई है. जंहा यह सभी शिशु एक साल तक के थे. मामला जब दिल्ली पहुंचा तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए. आईएएस अधिकारी वैभव गालरिया के प्रतिनिधित्व में बनी जांच समिति शुक्रवार शाम को कोटा पहुंची. अस्पताल के अधीक्षक एचएल मीणा से कमेटी ने पूछताछ की. अस्पताल में इस हफ्ते 48 घंटों के अंदर 10 नवजात शिशुओं की मौत हुई है. वहीं इन मौतों को पूरा अमला पहले स्वाभाविक और सामान्य बताकर दबाने में जुटा रहा. हालांकि मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार हरकत में आई. इन मौतों के पीछे संक्रमण को मुख्य कारण माना जा रहा है. इसके अलावा अस्पताल के उपकरण भी खराब हैं.

सूत्रों से मोली जानकारी के अनुसार  सीएम अशोक गहलोत ने कहा, पिछले छह साल में सबसे कम मौतें हुई हैं. हालांकि एक बच्चे की मौत भी दुर्भाग्यपूर्ण है. लेकिन इससे पहले के सालों में 1500 और 1300 बच्चों की मौत हुई है. लेकिन इस बार ये आंकड़ा 900 है. अस्पतालों में हर रोज कुछ मौतें होती हैं. इसमें कुछ नया नहीं है. कार्रवाई की जा रही है. 

ओम बिड़ला ने जताई थी चिंता: वहीं यह भी कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर कोटा से सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने शुक्रवार को कहा कि कोटा के एक मातृ एवं शिशु अस्पताल में 48 घंटे में 10 नवजात शिशुओं की असामयिक मौत का मामला चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.

हर दिन होती है 2-3 नवजात की मौत: आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि अस्पताल में सामान्य तौर पर रोजाना 2-3 नवजात शिशुओं की मौत होती है. यहां सोमवार को छह जबकि मंगलवार को चार बच्चों की मौत हुई. सूत्रों के अनुसार पांच दिन पहले भी इसी तरह एक साथ कुछ बच्चों की मौत हुई थी. जिन्हें बचाने के लिए पूरा स्टाफ जुट गया था.

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