वन्य प्राणी सप्ताह विशेष :वन्य जीवों के संरक्षण पर जागरूकता की जरूरत

हमारा यह भारतवर्ष  संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है. हमारे देश में प्रत्येक दिन को महत्वता दी गई है. जिसे हम किसी न किसी रूप में मनाते है. इसी के चलते हमारे देश में अक्टूबर महीने की 2 से 8 तारीख तक वन्यजीव सप्ताह के रूप में मनाते है .वन्यजीव पर्यावरण का एक अभिन्न अंग है.हमारे देश के धन का गठन इन्ही से होता है. इसमें जंगली जानवर, पक्षी, पौधे आदि शामिल हैं.

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य -

प्रत्येक समुदायों व परिवारों को प्रकृति से जोड़ना,
मानव के अंदर संरक्षण की भावना पैदा करना,
वन्यजीव व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जागरूक रहना,

इस अभियान की उद्देशिका यह है.की हमें हमेशा प्रत्येक वन्य-प्राणी,पशु -पक्षियों और पौधों को पूर्ण रूप से सुरक्षा प्रदान करना चाहिए . इसके लिए केन्द्र सरकार ने कुछ क्षेत्रों को अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी घोषित किया है .सरकार ने अधिनियम के तहत सभी जंगली जानवरों और पक्षियों आदि के शिकार पर रोक लगाईं ,और सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान भी रखा गया.

प्रकृति के अनुसार मानव,पर्यावरण और वन्यजीव एक दुसरे से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए है .मनुष्य के शरीर व मस्तिष्क को स्वस्थ रखने ,शुद्ध ऊर्जा प्राप्त करने के लिये हमारे पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना बेहद ही जरूरी है .पर्यावरण से ही मानव का जीवन सम्भव है .और पर्यावरण को शुद्ध व साफ सुथरा रखना है तो वन व वन्यजीवों की सुरक्षा करना जरूरी है. 

 वन्यजीव सप्ताह क्यों मनाया जाता  है -

 वन्यजीवों के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व ही न रह जाएगा, उसका जीवन संकट में पड़ जायेगा. इसलिए वन्यजीवों के महत्व को समझने व इनके प्रति जागरूक रहने के लिए सम्पूर्ण विश्व में एक अभियान के रूप में वन्यजीव सप्ताह मनाया जाता है.वन्य जीवों की सुरक्षा के लिये प्रत्येक व्यक्ति को आगे लाने के लिए भारतीय वन्य जीव बोर्ड ने वन्यजीव सप्ताह मनाने का निर्णय लिया और तब से यह 2 से 8 अक्टूबर तक प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है .

आज प्रकृति से जो भी प्राप्त हो रहा है .सबकी कुछ न कुछ महत्वता है.चाहे वह जीव हो या पेड़ -पौधे ,सभी एक दूसरे से जुड़े हुए है.आज यदि वृक्ष है तो ही मानव और प्राणियों का जीवन सम्भव है .

आज क्यों संकट में है जैव विविधता-

हमने जिससे बहुत कुछ पाया,क्यों उन्हें सताते  है .
दुनिया में  बेजुबान जीव-जंतु और वनस्‍पतियों पर खतरे के बादल मंडराते  है .

मानव हस्‍तक्षेप के द्वारा आज लगभग 41 हजार से भी अधिक जीवों की प्रजातियां विलुप्‍त होने की कगार पर पहुंच गई हैं.उनका जीवन संकट में पड़ने लगा है.ऐसा क्यों? क्या हम भूल बैठे है की उनके न रहने से हमारा जीवन भी संकट में पड़ जाएगा ,प्रकृति का सारा सन्तुलन बिगड़ जाएगा.विलुप्‍त हो रही पशु पक्षी ,पेड़ -पौधों की प्रजातियों से प्रकति का सन्तुलन बिगड़ा तो मानव जीवन अस्त -व्यक्त हो जाएगा.तब मानव के पास केवल पछतावा होगा न होगें  पेड़-और पौधें न ही रह जायँगे  ये जीवा और जंतु .

यदि अब भी हमारी आँखें खुल गई तो हम जैव विविधता के हो रहे  ह्रास को दूर कर सकते है.हम जीव-जंतु और वनस्‍पतियों की रक्षा को अपना परम कर्तव्य मानकर आगे बढ़ें तभी विकास कर पायेगें .

वन्य जीवों को भी है जीनें का अधिकार ,बंद हो इनपर अत्याचार.

आज प्रत्येक मानव को जीवों की रक्षा करना अपना एक कर्तव्य के रूप में अपने जीवन में उतारना है.मानव को मानव जीवन मिल जाने से उसके सारे कार्य पूंर्ण नहीं हो जाते वह  यह जाने की उसे मानव जीवन इसलिए  दिया गया की वह  इस धरातल पर आकर अपने जीवन कर्तव्यों के साथ ही साथ ,अन्य मानव ,जीव -जंतु, पशु -पक्षी ,पेड़  -पौधों की रखा करे .इन सभी के लिए जीवन भर जागरूकता के साथ जिए .तभी उसके जीवन का अतित्व है.जीवन तो पशु- पक्षी भी जी लेते  है.                                   

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