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WHATS APP: डाटा हो जाये चोरी तो मिलेगा हर्जाना, जानिए क्या है कानून में प्रावधान
WHATS APP: डाटा हो जाये चोरी तो मिलेगा हर्जाना, जानिए क्या है कानून में प्रावधान

दिनों दिन के डाटा चोरी के मुद्दे देखने और सुनने को मिल रहे है, जिसके कारण यूजर्स असुरक्षित महसूस कर रहे है. यदि यूजर्स चारे तो निजी जानकारी लीक होने पर कोर्ट में इन कंपनियों के लिए मुद्दा दर्ज कराकर हर्जाने की मान कर सकता है. वही सरकार को भी जिम्मेदार ठहरा सकते है. अमेरिका, ब्रिटेन जैसे कई देशों में इन इंटरनेट कंपनियों को ग्राहकों की निजता से छेड़खानी के मुद्दे में अरबों रुपये का हर्जाना लिया गया है. साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल का कहना है कि आईटी कानून 2011 की धारा 75 के तहत स्पष्ट है कि कोई टेक कंपनी भारत में हो या नहीं हो, लेकिन अगर देश के अंदर कंप्यूटर, मोबाइल या अन्य माध्यमों पर सेवाएं दे रही है तो उसकी जिम्मेदार होंगी.

वही कानून की धारा 43 और 43 ऐसी कंपनियों से हर्जाना ले सकते है. क्लास सूट एक्शन के तहत सभी पीड़ित यूजर्स को हर्जाना देने के लिए कंपनी बाध्य बन सकती है. वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मोनिक मेहरा ने कहा है कि जिम्मेदारी  के लिए कड़े कानून के साथ यूजर को खुद सतर्क रहने की आवश्यकता है.

बीते वर्ष मिला था निजता का अधिकारी: सूत्रों के मुताबिक बीते वर्ष उच्चतम न्यायालय ने जस्टिस पुट्टास्वामी बनाम संघ मामले में जीवन जीने के अधिकार में निजता के अधिकार को शामिल माना था. अगर आपके इस अधिकार का उल्लंघन किया जाए तो सरकार से राहत के लिए रिट याचिका दर्ज होगी. हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 और उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 32 के तहत यह दर्ज किया जाएगा.

देना होगा सोशल मीडिया को जबाब: मिली जानकारी के मुताबिक साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका या किसी अन्य देश में मुख्यालय या सर्वर होने की दलील देकर इंटरनेट कंपनियां या सोशल मीडिया साइट जवाबदेही से बच नहीं सकतीं. आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत व्हाट्सएप और इंटरनेट कंपनियों की जबाबदारी है कि वे यूजर की निजता को लेकर पूरी सावधानी बरतें. हालांकि यूजर्स को खुद सतर्क रहने की भी जरूरत है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मोनिक मेहरा के मुताबिक, हम किसी इंटरनेट कंपनी का कोई भी सॉफ्टवेयर, एप या फीचर इंस्टाल करते हैं या साइन इन करते हैं, तो उनसे जुड़ी तमाम नियम-शर्तें होती हैं, जिन्हें कोई नहीं पढ़ता. इन्हीं की आड़ में कंपनियां जबब्ब देने से बचना चाहती है.

सावधान रहे:

1. एप अपडेट रखें सभी ऑपरेटिंग सिस्टम पर एप को अपडेट करें और बेहतर है कि ऑटो अपडेट मोड पर रखें, जो वाईफाई या इंटरनेट पर अपडेट हो जाएगा. ये अपडेट सुरक्षा संबंधी कमियों को कम करते है.

2. प्रमाणीकरण न भूलें टू फैक्टर अथांटिकेशन भी सुरक्षा को बेहतर बनाता है. फिंगर प्रिंट, पासवर्ड, पिन सुरक्षा की अतिरिक्त बनता है. व्हाट्सएप जैसी सोशल साइट, वॉलेट सभी में इसका उपयोग आसानकर सकते है.

3. अहम दस्तावेज हों तो एंटी वायरस यदि आप सामान्य एप इस्तेमाल करते हैं तो प्ले स्टोर से अपडेट ही पर्याप्त है. लेकिन अगर कोई संवेदनशील या जरूरी फाइल या डाटा का उपयोग करते हैं तो एंटी वायरस लिया जा सकता है.

4. जाने बिना मंज़ूरी न दें प्ले स्टोर से कोई एप डाउनलोड करते समय लोकेशन के अलावा एसएमएस, मीडिया, फोटो, कैमरा एक्सेस करने की मंजूरी मांगी जाती है. ध्यान दें कि क्या गेमिंग ज्यादातर एप में इसकी जरूरत है या नहीं. सामान्य एप पर तो कोई एक्सेस न दें.

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