भोजन की थाली के चारों और जल छिड़कने से मिलता है पुण्य

प्राचीन काल से चली आ रही परम्परा के अनुसार अभी भी कुछ व्यक्तियों को आपने देखा होगा. जब भी वे भोजन करने बैठते है तो सबसे पहले भोजन को प्रणाम करते है या उस भोजन के चारो और जल चढ़ाते. आपने कभी इसके बारे में सोचा है की वह लोग ऐसा क्यों करते है, तो आज हम इसी के बारे में थोड़ी चर्चा करते है की कुछ लोग भोजन करने से पहले भोजन को प्रणाम क्यों करते है या उस भोजन के चारो तरफ पानी क्यों डालते है-

दोस्तों आपने देखा ही होगा अपने घरो में बड़े बुजुर्गो को जब भी वे भोजन करने बैठते है तो सबसे पहले वह अपनी भोजन की थाली को प्रणाम करते है और उस थाली के चारो और जल डालते है और अपनी थाली में से थोडा थोडा अन्न निकाल कर रख देते है.

दोस्तों इस बात पर हमारे बड़े बुजुर्गो का कहना है की भोजन करने से पहले भोजन को प्रणाम करना, इसका यह मतलब हुआ की वह लोग अन्न देवता को धन्यवाद देते है की हे अन्न देवता हमारी इस पूर्ति के लिए आपको धन्यवाद है.

और अपनी भोजन की थाली में से थोडा सा अन्न निकाल कर रख देना और भोजन की थाली के चारो और जल डालना इसका यह मतलब हुआ की वह लोग अपने पूर्वजो को भोजन अर्पित करते है और भोजन के साथ उन्हें पानी भी देते है.

अपनी थाली में से खाना निकालकर रखना और उसके चारो और पानी डालना इन सबका एक मतलब और भी हो सकता है की वह लोग उन लोगो के लिए खाना निकालते है जिन लोगो को खाना नसीब नहीं होता तथा वह अन्न देवता से उनकी कुशलता के लिए प्रार्थना करते है.  

 

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