विश्व कैंसर दिवस, कैंसर को मात देने की पहल

विश्व कैंसर दिवस, कैंसर को मात देने की पहल

4 फरवरी को पूरा विश्व कैंसर दिवस के रुप में मनाता है। 2016 के कैंसर दिवस का टैग लाइन है "we can.I can". इसकी शुरुआत लोगों को जागरुक करने के लिए की गई थी। इस साल इस नेक काम को शुरु किए 10 साल हो गए। इसका लक्ष्य यह सिद्ध करना है कि हर अकेला व्यक्ति इससे लड़ सकता है।

4 फरवरी 2006 को यह पहली बार मनाया गया था। we can.I can टैग लाइन देने का मकसद यह है कि हर इंसान कैंसर को मात देने में अपनी अङम भूमिका निभा सकता है, जैसेः

we can:

1. स्कूलों में बच्चों को बताना कि कैंसर से कैसे बचा जा सकता है और यह जिम्मेदारी स्कूल की बनती है।

2.हम सरकार से गुहार लगा सकते है कि वो कैंसर से लड़ने के लिए अधिक से अधिक फंड सेंक्शन करें।

3.इस मिथक को रोकना कि कैंसर के रोगी कलंक है।

I can:

1.धूम्रपान बिल्कुल नहीं करना है।

2.हर व्यक्ति को यह जानना चाहिए कि कैंसर के लक्षण और बचाव क्या-क्या है।

3.लोगों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए पूर्ण उफचार के बाद काम पर जरुर लौंटे।

कैंसर रिसर्च यूके ने अपना खुद का टैगलाइन बनाया है, जिसे वो सार्थक भी करते है। उनका टैगलाइन है 'We Can Do Something About Cancer.'इसे सार्थक करने के लिए फाउंडेशन इस साल यूनिटी बैंड को प्रोमोट कर रहा है। इसे अधिक से अधिक बेच कर फंड एकत्रित किया जा रहा है, जिससे कैंसर रोगियों के इलाज में मदद हो सके। वर्तमान में विश्व 200 प्रकार के कैंसर है।

जिसमें लंग कैंसर, स्किन कैंसर, आंत का कैंसर, एसोफोजिया कैंसर जैसे कितने है। लंग कैंसर से सलाना 1.4 मिलियन लोगों की जानें जाती है, जो कि बर्मिंघम और कवेंट्री की आबादी के बराबर है। आंत के कैंसर से सलाना 7,40,000 लोग और यकृत कैंसर से 7 लाख लोग मौत के मुंह में चले जाते है। आंकड़ो की मानें तो 2030 तक कैंसर से सलाना 12 मिलियन लोगों की जानें जा सकती है।

हैरानी की बात यह है कि कैंसर के 70 फीसदा मामले विकसित देशों में है। जिसमें उतरी अमेरिका, ओसियानिया और पश्चिमी यूरोप सरीखे देश है। डॉक्टरों का कहना है कि लाइफ स्टाइल में बदलाव करके हम 30 फीसदी तक कैंसर को मात दे सकते है। शारीरिक रुप के साथ-साथ कैंसर का आर्थिक स्थिति पर भी असर होता है, अनुमानतः 290 बिलियन डॉलर सलाना कैंसर से लड़ने के लिए खर्च किया जाता है। 2030 तक यह 35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

ऐसे में हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि हम कैंसर को मात देने में जितनी भूमिका निभा सके उतना जरुर निभाए...... "we can.I can"