फूड सिक्योरिटी बिल पर भड़की सुप्रीम कोर्ट, क्या गुजरात भारत का क्षेत्र नहीं

Feb 01 2016 03:22 PM
फूड सिक्योरिटी बिल पर भड़की सुप्रीम कोर्ट, क्या गुजरात भारत का क्षेत्र नहीं

नई दिल्ली : फूड सिक्योरिटी बिल, मनरेगा, मध्याह्न भोजन योजना जैसी योजनाओं की उपेक्षा करने को लेकर केंद्र सरकार से सर्वोच्च न्यायालय ने सवाल किए। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने फटकार लगाते हुए कहा कि संसद द्वारा पारित किए गए कानून को गुजरात जैसा राज्य कार्यान्वित नहीं कर रहा है। आखिर इसका कारण क्या है। सर्वोच्च न्यायालय ने सवाल किया है कि क्या गुजरात भारत का क्षेत्र नहीं है फिर यहां इन योजनाओं की उपेक्षा क्यों की जा रही है।

इस मामले में न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर के नेतृत्व में बेंच ने कहा कि आखिर संसद क्या कर रही है। उल्लेखनीय है कि इस तरह की योजनाऐं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल में लागू की गई थीं लेकिन कांग्रेस विरोधी केंद्र की एनडीए सरकार पर इन योजनाओं की उपेक्षा का आरोप लगता रहा है। यही नहीं भाजपा शासित राज्यों को लेकर अधिक सवाल किए जा रहे हैं कि इन राज्यों में इस तरह की योजनाऐं क्यों लागू नहीं की जाती हैं।

केंद्र सरकार से पीठ ने 10 फरवरी तक हलफनामा दायर करने को कहा। इस मामले की सुनवाई दो दिन बाद करने को कही गई। सुप्रीम कोर्ट ने 18 जनवरी को केंद्र से मनरेगा, खाद्य सुरक्षा कानून और मध्याह्न भोजन योजनाओं के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी देने को कहा था। न्यायपीठ द्वारा यह सवाल भी किया गया कि आखिर कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, झारखंड, बिहार, हरियाणा, चंडीगढ़ आदि को सरकार द्वारा राहत उपलब्ध क्यों नहीं करवाई जा रही है।

इन क्षेत्रों में सूखे के चलते कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है और रोजगार भी घट रहे हैं। जनहित याचिका गैर सरकारी संगठन स्वराज अभियान द्वारा दाखिल की गई थी। इसका संचालन योगेंद्र यादव जैसे लोगों द्वारा किया गया। इस याचिका में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने की मांग भी की गई। न्यायालय ने आदेश दिए कि हर माह एक व्यक्ति को 5 किलो खाद्यान्न सुविधा उपलब्ध करवाई जाए।