लिंग जांच को लेकर कोर्ट सख्त, एजेंसी गठन के आदेश

नई दिल्ली :  सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट पर गर्भ में ही बच्चे की लिंग जांच के तरीकों की जानकारी मौजूद होने के मामले में सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने यह पूछा है कि इस मामले में सरकार ने अभी तक सख्ती क्यों नहीं की। कोर्ट ने सरकार को यह आदेश दिया है कि वह इस तरह की जानकारी इंटरनेट पर नहीं आने दे।

आदेश दिये गये है कि एक नोडल एजेंसी बनाई जायें, ताकि लोग इस तरह की सामग्री की शिकायत कर सके। शिकायत मिलने के 36 घंटे बाद सामग्री हटाने के लिये कहा गया है। गौरतलब है कि इंटरनेट पर न केवल लिंग जांच तरीके बताये जाते है वहीं अन्य कई ऐसी सामग्री भी है, जो आपत्तिजनक मानी जा सकती है। बताया गया है कि इंटरनेट पर चलने वाले सर्च इंजन में ऐसे कई विज्ञापन चल रहे है, जिनमें गर्भ में ही बच्चों का लिंग जांचने के तरीके बताये गये है।

जानकारी के अनुसार साबू मैथ्यू जार्ज नामक किसी व्यक्ति ने कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुये सर्च इंजन पर चलने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाने की मांग की है। मामले की सुनवाई करते हुये कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और सरकार से यह कहा है कि वह नोडल एजेंसी का गठन करें। इसके पहले भी कोर्ट केन्द्र सरकार से यह कह चुकी है कि वह गूगल, माइक्रो साॅफ्ट और याहू के साथ बैठक कर मामले को हल करें। लेकिन जब सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाये तो कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है।

अब सिर्फ यादों में बनी रहेगी याहू इंटरनेट...

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