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फिल्म के चलते 1 महीने से ज्यादा सदमे में रहे संजय मिश्रा, खुद किया खुलासा
फिल्म के चलते 1 महीने से ज्यादा सदमे में रहे संजय मिश्रा, खुद किया खुलासा

बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार संजय मिश्रा को आप सभी बहुत अच्छे से जानते होंगे। वह अपने अभिनय से सभी का दिल जीत चुके हैं। आप सभी को बता दें कि नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा कोर्स के बाद, जब अभिनेता संजय मिश्रा ने 90 के दशक की शुरुआत में अभिनय करना शुरू किया, तो उनकी एकमात्र खोज प्रभावशाली भूमिकाएं सर्च करने की थी। ऐसे में अब एक्‍टर संजय मिश्रा ने मीडिया को दिए इंटरव्‍यू में खुलासा किया कि उन्हें कभी भी मुख्य भूमिका निभाने की भूख नहीं थी, लेकिन हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ शॉट देने की इच्छा जरूर थी। चाहे फिल्म की लंबाई या उसके पैमाने कुछ भी हो।

एक मशहूर वेबसाइट से बातचीत में उन्होंने कहा "मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी दिन मैं किसी प्रोजेक्ट का प्रमुख चेहरा बनूंगा। मेरा उद्देश्य सिर्फ एक था - फिल्म चाहे जैसे भी हो लोग कहें कि 'आप बहुत अच्छे थे' चाहे वह किसी भी अन्य शैली की कॉमेडी हो। लेकिन, आंखो देखी ने खेल को बदल दिया, उसके बाद मसान, कड़वी हवा, दम लगा के हईशा और शुक्र है कि अब तो कमाल का काम आ गया है।'' आगे उन्होंने कहा वह इस बात से खुश हैं कि चलन बदल गया और पात्र मुख्य सितारे बनने लगे। इसी के साथ उन्‍होंने कहा, 'यह दुर्लभ है कि निर्माता हम जैसे अभिनेताओं को किसी प्रोजेक्ट के प्रमुख चेहरे के रूप में देखते हैं।'

इसके अलावा उन्‍होंने कहा, 'मुख्‍य पात्र के रूप में लोग देखते जरूर हैं लेकिन हिम्मत बहुत कम लोग करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे अब ऐसा होने लगा है। बहाव आया है और दर्शकों का स्वाद भी बदल गया है। हीरो, हीरोइन के अलावा भी अब कहानियां हैं।।। जिसके कारण, अब बड़े प्रोडक्शन हाउस हमें एक प्रमुख चेहरे के रूप में देखते हैं।' इसी के साथ संजय मिश्रा ने कहा "मेरे साथ सबसे अच्छी बात यह हुई कि तथाकथित सफलता मुझे धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से मिली - वरना लोग पगला जाते हैं। कदम-कदम पर चढ़कर मैंने अपने पैर जमीन पर टिकाए रखे और यही कारण है कि मुझे गहरे चरित्रों की खोज करने वाली लघु फिल्में करने में मजा आता है। कुछ नया करने की भूख मुझमें चलती रहती है। मैं आंखो से इतना जुड़ गया कि मुझे डायबिटिक हो गया और ग्वालियर नाम की इस डार्क फिल्म को लपेटने के बाद, मैं एक महीने से अधिक समय तक सदमे में रहा।''

वहीं आगे उन्होंने अपनी आने वाली फिल्‍मों के बारे में बताया और कहा "मैंने रोहित शेट्टी की सर्कस, अनीस बज्मी की भूल भुलैया 2, कलर ब्लाइंड, वो तीन दिन के लिए चुनार-वाराणसी में शूटिंग की है। मैंने लेह-लद्दाख में एक प्यारी सी फिल्म की शूटिंग की, इसके अलावा शिक्षक दिवस और भगोड़ा दोनों देहरादून में। कुछ और प्रोजेक्ट हुए हैं लेकिन आजकल वो नॉन-डिस्क्लोजर साइन करवा लेते हैं।''

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