बुजुर्ग की मौत मामले में सिद्धू को सुनाई गई थी 3 साल जेल की सजा.., अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
बुजुर्ग की मौत मामले में सिद्धू को सुनाई गई थी 3 साल जेल की सजा.., अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
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अमृतसर: पंजाब विधानसभा चुनाव से दो हफ्ते पहले प्रदेश कांग्रेस इकाई के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ 33 साल पुराना मामला फिर से खुल गया है. दिसंबर 1988 के मामले में सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है. पीड़ितों ने मई 2018 में शीर्ष अदालत के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति एमएम खानविलकर की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. 

दरअसल, 15 मई 2018 को शीर्ष अदालत ने सिद्धू पर 1988 के रोड रेज केस में 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था. सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमे हाईकोर्ट ने सिद्धू को 3 साल कैद की सजा दी थी. अब सर्वोच्च न्यायालय के उसी फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की गई है.  

क्या है पूरा मामला :-

दरअसल, 27 दिसंबर 1988 की शाम सिद्धू अपने दोस्त रूपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरावाले गेट के बाजार गए थे. ये जगह उनके घर के नजदीक ही है. उस वक़्त सिद्धू एक क्रिकेटर हुआ करते थे. उनका इंटरनेशनल करियर शुरू हुए एक साल ही हुआ था. इसी मार्केट में कार पार्किंग को लेकर उनका 65 वर्षीय एक बुजुर्ग गुरनाम सिंह से विवाद हो गया. बात हाथापाई तक जा पहुंची और सिद्धू ने गुरनाम सिंह को घुटना मारकर गिरा दिया. उसके बाद गुरनाम सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी जान चली गई. रिपोर्ट में आया कि गुरनाम सिंह की मौत हार्ट अटैक आने से हुई थी. उसी दिन सिद्धू और उनके दोस्त रूपिंदर पर कोतवाली थाने में गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया था. सेशन कोर्ट में मुकदमा चला. 1999 में सेशन कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया. वर्ष 2002 में पंजाब सरकार ने सिद्धू के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की. इसी बीच सिद्धू ने राजनीति में एंट्री कर ली.

2004 के लोकसभा चुनाव में सिद्धू अमृतसर सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़कर संसद पहुंचे.  5. दिसंबर 2006 को इस मामले में उच्च न्यायालय का फैसला आ गया. उच्च न्यायालय ने सिद्धू और संधू को दोषी करार देते हुए 3-3 साल कैद की सजा सुनाई. साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोंका. सिद्धू ने लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया. HC के इस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई और सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी. जिसके बाद 2007 में सिद्धू फिर अमृतसर से चुनाव जीता. । 

बता दें कि 1988 के केस में सिद्धू और संधू पर दो केस दर्ज हैं. पहला गैर इरादतन हत्या का और दूसरा रोड रेज का. इसमें सिद्धू पर चोट पहुंचाने की धारा भी लगी थी.  मई 2018 में पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने सिद्धू और संधू को दूसरे यानी कि रोड रेज के मामले में दोषी करार देते हुए 3-3 साल कैद की सजा सुनाई थी. यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और शीर्ष अदालत ने सिद्धू और संधू को सभी आरोपों से बरी कर दिया. हालांकि, अदालत ने रोड रेज केस में सिद्धू पर 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. अब सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले पर पुनर्विचार करने की याचिका दाखिल हुई है.

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