सम्मन और सम्मान दोनों साथ साथ

हमारे देश मे सम्मन और सम्मान का नाता बड़ा पुराना है,देश की जनता जिसे भी सम्मान दे दे वो अपने आप सम्मन तक पहुच ही जाता है। जैसे - राधे माँ और सम्मन.... सुखविंदर सिंह उर्फ राधे माँ जो पंजाब के गुरदासपुर से है जिन्हे ये टाइटल होशियारपुर के उनके गुरु महंत रामदीन दास ने दिया और ये राधे माँ बन गयी,और जब इनके अनुयायी बढ्ने लगे तो “ममता मयी श्री राधे माँ ने चेरीटेबल ट्रस्ट” बनाया और ट्रस्टी बने संजीव गुप्ता जिनके घर मे ये 12 साल से रह रही थी,उनही के परिवार की सदस्या को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और आश्रम मे काम करने के लिए मजबूर करने के आरोप के चलते राधे माँ को कोर्ट ने सम्मन जारी किया है और चार दिन मे जवाब मांगा।इस पर भी राधे माँ उर्फ सुखविंदर कह रही है “मुझ पर लगे सारे आरोप झूठे है,मै बेकसूर हूँ मेरा न्याय ऊपर वाला करेगा,सच्चाई की जीत होगी।” 
राधे माँ ने बॉलीवुड को भी एक्टिंग मे पीछे छोड़ दिया है,इतनी एक्टिंग तो न ऋषि कपूर को आती है न आलिया भट्ट को,राधे माँ के कुछ फोटो जो उनके नाम और औदे से बिलकुल भी मिलान नहीं खा रहे है,उनके रेड मिनिस्कर्ट वाले फोटो को देख कर कई लोगो ने “राधा ऑन डांस फ्लोर”जैसे कमेंट भी पोस्ट किए।
ऋषि कपूर ने अपनी नाराजगी जताने के लिए ट्वीटर का इस्तेमाल किया और कहा–“जागो इंडिया जागो! कमजोरी का फायदा उठाया जा रहा है इन एक्टर्स के जरिये, मै भी एक्टर हूँ लेकिन मै एंटरटेन करता हु पर धोखा नहीं देता।सोचना” कुछ फोटो ऋषि कपूर ने भी पोस्ट किए और किसी मे लिखा "बोल राधा बोल तूने ये क्या किया","द नेक्स्ट बाबा इज ऋषि मुनि ऋषि",उन्होने राधे माँ को स्वघोषित आध्यात्मिक गुरु बताया,ऋषि जी ने तो राधे माँ के मेकअप की तुलना अपने दोस्त बप्पी लहरी से भी कर डाली,अब तो किसी भी आध्यात्मिक गुरु से बात करने मे भी सावधानी बरतनी  चाहिए कही  वो आपको अपनी बातों न फांस ले। बच कर रहे आज के बाबाओ और देवियों से। पूजा और सम्मान की आड़ मे ठगने से बचे,दूसरों पे विश्वास करने की बजाए खुद पे करे।   

 

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