गुजरात से नई दिल्ली तक पुरा प्रशासनिक एवं राजनैतिक तन्त्र कठपुतली बना

गुजरात का पाटीदार-आरक्षण जेल भरो आंदोलन, पुलिस से झडप, गिरफ्तारियों-रिहाईयो व गरिब सवर्णों को आरक्षण से गुजरता हुआ सरकारी रूप से पटापेक्ष की दिशा में अग्रसर गुजरात की मुख्यमंत्री हो, भारत के प्रधानमंत्री हो व जिस राजनैतिक पार्टी के माध्यम से चुनकर आये उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष ही क्यो ना हो इन्हे लग रहा था कि वे ही सर्वेसर्वाह है और सबकुछ निर्धारित करके समय को अपने निर्णयों से जामा पहना जनता को कठपुतली की तरह नचा डालेंगे परन्तु उल्टा वे कठपुतली की तरह नाच रहे थे आपके वैज्ञानिक-विश्लेषण पर |

गुजरात में जुलाई-2015 से शुरु हुआ पाटीदार/पटेल आरक्षण आंदोलन अगस्त में जबरदस्त हिंसा के दौर से गुजरा व अप्रैल-2016 में जेल भरो आंदोलन हुआ | इसके बाद गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देकर इसे खत्म करने की भूमिका रच अब गाँवों-गाँवों में अपनी कामयाबी का गुणगान करने के लिए सभाओं, रेलियो की पुरी योजना बना डाली | पाटीदार/पटेल आरक्षण के आंदोलन के साथ हमने तारीख 03 सितंबर, 2015 को अपनी पोस्ट के माध्यम से सर्वप्रथम कहा की "ये आरक्षण की आग राष्ट्रीयता के हित में है ..... 

यह समय के साथ सच्चाई में बदल गया और हमने तारीख 23 जनवरी, 2015 को पोस्ट "आपकी सोच की कठपुतली बनने लगे लोग" के माध्यम से सुचित किया | इसके पहले हमने 24 सितंबर, 2015 को अपने वैज्ञानिक-विश्लेषण "विज्ञान की नजर से ऐसा होगा आरक्षण का भविष्य!" के माध्यम से आगे होने वाली सारी घटनाओं को लिपिबद्ध कर आपको बता दिया | राजनैतिक पार्टी के तौर पर राज्य सरकार के कदम राजनैतिक सिद्धांतो एवं चालों के अनुरूप चली, पहले बातचीत के लिए बुलाया अर्थात "साम-नीति" इसके बाद आर्थिक पैकेज की घोषणा करी अर्थात "दान-नीति" इसके बाद आंदोलन के नेताओं को कानून के माध्यम से जेल में डाला, आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज, अश्रु गैस का प्रयोग हुआ अर्थात "दण्ड-नीति" इसके बाद अंतिम रूप में दो चर्चित चेहरों को आपस में टकराने की कोशिश अर्थात "भेद-नीति" इसके आगे हमने सरकारी पक्ष के साथ अन्य पक्षों के कदमों को भी पहले ही आपको अवगत करा दिया |

इस आरक्षण के आंदोलन खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष व प्रधानमंत्री सीधे संपर्क में थे और समय-समय पर फेस-टु-फेस चर्चा जारी रही अर्थात गुजरात से नई दिल्ली तक पुरे प्रशासनिक व राजनैतिक तन्त्र की सोच कार्य कर रही थी | हमारे लिखे अनुसार बीच में कई मध्यस्थ नेताओं के नाम आये और उन्होने भी वही सलाह दीं जो हमने पहले ही बता दीं थी | पटेल आरक्षण को खत्म करने के लिए "भेद-नीति" के तहत बीच में ठाकुरो का इस्तेमाल हुआ परन्तु यह घृणित-राजनीति सरकार के लिए महँगी पड़ी और गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के लिए जनता को गुमराह या भ्रमित के लिए हरियाणा के जाट आंदोलन के हिंसा वाले मार्ग का सहारा लेना पड़ा | 

यह तरीका दोनो पक्षों के लिए अनुकूल था | जेल भरो आंदोलन के पहले व बाद में जिस तरह मुख्यमंत्री, सरकार व आंदोलनकारी ग्रुप के कई सदस्यों के बयान आये वो सभी इसी बात की ओर ईशारा कर रहे थे | इतनी सब तोड़-फोड़, उठा-पठक, हिंसक गतिविधियों के बाद परिणाम क्या निकला ........ वही जो हमने पहले बता दिया था | इस पुरे घटनाक्रम में सरकारी व राजनैतिक तन्त्र अपने आप को कथकथित भगवान से बड़ा व समय को नियंत्रित करने के अपने घमंड में डूब चुका है ओर ईंसान को भगवान बनाने की सबसे ओछे राजनैतिक ब्रह्मास्त्र आम जनता पर दाग डाला |

इसके तहत विशेष रूप से सोशल मीडिया पर यह बातें फैलाना शुरु कर दीं की यह एक व्यक्ति जो प्रधानमंत्री पद पर पदासीन है उसकी भावी योजना थी ताकि वो आरक्षण के सिस्टम को बदल सके | अब आगे क्या होगा, वह जानने के लिए हमारे वैज्ञानिक-विश्लेषण "विज्ञान की नजर से ऐसा होगा आरक्षण का भविष्य!"  

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