आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं पं. दीनदयाल उपाध्याय

Feb 11 2016 12:42 PM
आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं पं. दीनदयाल उपाध्याय

पं. दीनदयाल उपाध्याय जिन्हें भारतीय जनता पार्टी का अहम आधार माना जाता है। वे दीनदयाल उपाध्याय जो एकात्म मानववाद के प्रेरक थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के छोटे से ग्राम नगला चंद्रभान में हुआ था। उनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय था। माता रामप्यारी एक धार्मिक महिला थी। 

हालांकि दीनदयाल उपाध्याय को बचपन से ही माता - पिता का प्रेम कम ही मिल पाया। दरअसल 7 वर्ष में ही माता और पिता दोनों इन्हें छोड़कर इहलोक चले गए। दीनदयाल उपाध्याय ने पिलानी, आगरा और प्रयाग में शिक्षा हासिल की। बीएससी, बीटी करने के बाद उन्होंने नौकरी तो की लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वे सक्रिय कार्यकर्ता रहे। 

महाविद्यालय छोड़ने के ठीक बाद वे इस संस्था के प्रचारक नियुक्त किए गए। इसके बाद वे वर्ष 1951 में अखिल भारतीय जनसंघ के संगठन मंत्री बनाए गए। करीब 2 वर्ष बाद सन् 1553 में उपाध्यायजी को अखिल भारतीय जनसंघ के महामंत्री निर्वाचित किया गया।

हालांकि दीनदयाल उपाध्याय के बढ़ते कदमों और उनके विचारों को रोकने का प्रयास किया गया लेकिन उनके विचार आज भी जनसंघ से निर्मित भारतीय जनता पार्टी को बल दे रहे हैं। 11 फरवरी को 1968 की रात में रेल यात्रा के दौरान मुगलसराय के समीप उनकी हत्या कर दी गई।

पं. दीनदयाल जी एक साहित्यकार भी थे। उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी में कई लेख लिखे जो कि पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। यही नहीं उन्होंने साहित्य रचनाऐं भी कीं। उनका कहना था कि भारत में रहने वाला और इसे लेकर ममत्व की भावना रखने वाला मानव समूह एक जन है, उनका जीवन वसुधैव कुटुम्बकम हमारी सभ्यता से प्रचलित है।

जिसके अनुसार भारत में विभिन्न धर्मों को समान अधिकार दिया जाता है। उन्होंने सम्राट चंद्रगुप्त नामक साहित्य की रचना की। यही नहीं उनके द्वारा रचा गया साहित्य दो योजनाऐं, राजनीतिक डायरी, भारतीय अर्थनीति का अवमूल्यन, सम्राट चंद्रगुप्त, जगद्गुरू शंकराचार्य और एकात्म मानववाद के ही साथ राष्ट्र जीवन की दिशा के नाम से जाना जाता है।