मर्द को दर्द नहीं होता, और अगर होता है तो फिर ध्यान देना है जरुरी

अगर आप अपने दिमाग को दर्द के प्रति अलग ढंग से प्रतिक्रिया करने की ट्रेनिंग देते हैं और पॉजिटिव सोच विकसित करते हैं तो दर्द के प्रभाव निश्चित रूप से घट जाते हैं। इस से व्यक्ति में कई फायदेमंद शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक परिवर्तन लाए जा सकते हैं। इसमें व्यक्ति को ऐसे स्थान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा जाता है, जहां दर्द न हो.यानी दर्द से ध्यान हटाकर कहीं और लगाने की कोशिश की जाती है।

आप जितना अधिक अपने दर्द के बारे में सोचेंगे दर्द उतनी अधिक शिद्दत से महसूस होगा और आप इससे अधिक परेशान होंगे। किसी खास स्थिति को लेकर आपके सोचने और रिएक्ट करने का ढंग आपके लिए उस स्थिति को बेहतर या बदतर बनाता है। यदि आप सोचेंगे कि मैं दर्द से बेहाल हूं, मेरा दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है तो दर्द भी आपको पूरे दम-खम के साथ सालता रहता है।

इसके उलट यदि आप सोचें कि गहरी-गहरी सांसे लेने से मेरा दर्द कम होगा और गहरी सांसें लेने लगें.तो धीरे-धीरे दर्द के अहसास और तीव्रता में निश्चित तौर पर कमी आएगी। कभी-कभी दर्द से ध्यान हटाना मुश्किल हो जाता है और अगर आप इस बारे में सोचना बंद ही नहीं करेंगे तो कोई उपाय या तकनीक काम नहीं कर पाएगी।

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