भगवान का दूसरा रूप है माँ

मां  
"भगवान का दूसरा रूप है मां ममता की गहरी झील है मां वह घर किसी स्वर्ग से कम नहीं जिस घर में भगवान की तरह पूजी जाती है मां"

यह वह शब्द है जिसकी व्याख्या संसार में कोई नहीं कर सकता यकीन से कहती हूं कि ईश्वर भी नहीं कितना ही हम लिखना या सोचना चाहिए यह शब्द उससे भी कहीं बड़ा है मां के व्यक्तित्व की गहराई को सही शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है।
हर एक के जीवन में मा ही एक ऐसी होती है जो हमारे दिल में किसी और की जगह नहीं ले सकती वह प्रकृति की तरह है जो हमेशा हमको देने के लिए जानी जाती है।

मेरी भी मां है एक नहीं 2-2 मां है एक वह जिन्होंने मुझे संस्कार दिए और दूसरी वह जिन्होंने मुझे अपनापन और धीरज रखना सिखाया उनकी नसीहत ए मुझे हर जगह काम आती है उनकी हर चीज हर वक्त उनकी बातें कहती है।

आज मेरी जन्म देने वाली मां मेरे साथ है पर दूसरी मां सासू मां मेरे साथ नहीं है वह नहीं है पर संभाले हुए हूं उनका पुराना चश्मा जिस से झांकती हैं उनकी आंखें रोक देती है मुझे कोई गलती करने से पहले ही।

और क्या लिखूं मैं तो खुद अपने आप को दोनों मां की परछाई मानती हूं मां आप दोनों में जो खूबियां हैं और थी मैं तो उसके आसपास भी नहीं हूं पर आपके दोनों के जैसा बनने की कोशिश करती रहूंगी।

"मांग लूं यह मन्नत,
कि फिर यही जहान मिले,
फिर वही गोद,
फिर वही मां मिले।"

निधि गोयल

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