पठानकोट हमले में मारे गए आतंकियों के परिजनों ने लिखाई थी उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के खुद की कही हुई बातें अब झूठी साबित हो रही है। पठानकोट हमले के संबंध में पाकिस्तान की जेआईटी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि पठानकोट अटैक भारत द्वारा रचा गया एक ड्रामा है। उसका पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन अब पिछले हफ्ते जांच के लिए भारत आई जेआईटी की टीम ने स्वीकारा है कि पठानकोट हमले में मारे गए दो आतंकियों के परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है।

जेआईटी ने खुद राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी को बताया था कि एयरबेस पर हमला करने वालों में से दो के परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई थी। पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने भारत आने से पहले इन आतंकियों के रिकॉर्ड की गहनता से जांच की थी।

एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद के इन चार आतंकियों की पहचान नासिर हुसैन, हाफिज अबु बकर, उमर फारुक और अब्दुल कयूम के तौर पर की थी। ये सभी पाकिस्तान में पंजाब और सिंध के रहने वाले थे। जेआईटी ने एनआईए को यह भी बताया था कि जैश के तीन हैंडलरों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके नाम खालिद मोहम्मद, इरशादुल हक और मोहम्मद शोएब है।

कहा जा रहा है कि इन तीनों ने ही आतंकियों को हमले के लिए भारत में प्रवेश करने में मदद की थी और जरुरी सामान उपलब्ध कराया था। एनआईए ने जेआईटी को पठानकोट हमले से जुड़े अहम सबूत दिए थे और जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर, उसके भाई अब्दुल रौफ, काशिफ जान और शाहिद लतीफ समेत कई अन्य को गिरफ्तार करने के लिए कहा था।

उपलब्ध कराए गए सबूतों में कॉल रिकॉर्ड्स, तकनीकी और फॉरेंसिक सबूत, डीएनए सैंपल, एफआईआर की कॉपियां और गवाहों के बयान शामिल थे।

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