इस शहर मे युवा क्यों हो रहे है मानसिक रोगी

इस शहर मे युवा क्यों हो रहे है मानसिक रोगी
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मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में डिप्रेशन और नशे के कारण मानसिक रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। पिछले तीन सालों में शहर के एमवायएच और मानसिक चिकित्सालय में तीन गुना तक मरीज बढ़े। 2015 में एमवाय में 20 से 22 मरीज रोज पहुंचते थे। 2017 में यह संख्या बढ़कर 60 से 70 हो चुकी है। वहीं मानसिक चिकित्सालय में ये संख्या 60-65 से बढ़कर 150 तक पहुंच गई है। तीन सालों में एक लाख 40 हजार से ज्यादा मरीज डिप्रेशन और इसी तरह की बीमारी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं।

 

विशेषज्ञों के मुताबिक शहर में मानसिक रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण काम की अधिकता और नशे के कारण संतुलन खोना सामने आया है। पढ़ाई के दौरान उपजा तनाव भी इसकी मुख्य वजह बनकर सामने आ रहा है। सरकारी के साथ ही निजी अस्पतालों में भी मनोचिकित्सकों के पास लोग इलाज करवा रहे हैं। 

डिप्रेशन का इलाज करवाने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा 25 से 35 साल के युवा हैं। वहीं 50 से 60 साल के लोगों की संख्या भी अधिक है। महिलाओं में भी डिप्रेशन देखा गया है, जो घर या काम के तनाव को लेकर अस्पताल पहुंची हैं।

मानसिक चिकित्सालय के डॉक्टरों के अनुसार आजकल बच्चे डांटने पर भी डिप्रेशन में आ जाते हैं। विशेषकर महिलाओं में यह समस्या सबसे अधिक देखी जा रही है। 20 से 30 साल तक की महिलाएं परिवार में कहासुनी के बाद डिप्रेशन के इलाज के लिए पहुंच रही हैं। बच्चों में इंटरनेट का अधिक इस्तेमाल करना, बात नहीं सुनना, पढ़ाई में मन नहीं लगना, ऐसी समस्याओं को लेकर भी माता-पिता इलाज के लिए लाते हैं।

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