काटजू ने तिलक को बताया ब्रिटिश एजेंट

नईदिल्ली: हमेशा सुर्खियों में रहने वाले भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने विवादित बयान देते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को ब्रिटिश एजेंट करार दिया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेयकाटजू ने लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि पर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को ब्रिटिश एजेंट बताते हुए उनकी विचारधारा को दकियानूसी करार दिया है।

पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति काटजू ने बालगंगाधर तिलक को हिंदू अतिवादियों के प्रचारक तक कहा है। उन्होंने कहा कि उनके कार्य इसकी पुष्टि करते हैं। मामले में यह बात सामने आई है कि काटजू ने ब्लाॅग में उल्लेख किया है कि तिलक महान सेनानी माने जाते हैं मगर 1894 में लोकमान्य तिलक ने गणेश पूजा को बढ़ावा दिया। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक समारोह करवाए और हिंदूओं से गायों की रक्षा करने और मुहर्रम में भागीदारी न करने की अपील भी की।

1891 में उन्होंने हिंदुत्व विरोधी बयान दिया और विवाह की आयु 12 वर्ष करने का विरोध किया। तो दूसरी ओर उन्होंने कहा कि लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने आर्यों का मूल निवास आर्कटिक को कहा था तो दूसरी ओर मुंबई में वर्ष 1896 के दौरान प्लेग फैलने पर अंग्रेज सरकार द्वारा मकान खाली करवाए जाने का विरोध भी किया। उन्होंने कहा कि तिलक ने भी गांधी की तरह अंग्रेजों के लाभ का ध्यान रखा तो दूसरीओर प्लेग के दौरान अंग्रेजों द्वारा मकान खाली करवाए जाने को लेकर उन्हें डर था कि हिंदू महिलाऐं इससे पर्दे के बाहर आ जाऐंगी। 

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