लिखने के शौक ने चाय वाले को बनाया चर्चित

आज के ज़माने में सब्जी बेचने वाले से लेकर चाय बेचने वाले तक सभी एडवांस हो गए है, कोई किसी से कम नहीं है. चाय बेचना अब छोटा व्यवसाय नहीं रह गया है, बल्कि इस व्यवसाय के लोग भी अब आगे बढ़ गए है. सबसे बड़ा उदाहरण आप सभी के सामने ही है. हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी एक समय पर चाय बेचने वाले ही थे. लेकिन उन्होंने कठिन संघर्ष और परिश्रम कर आज इतना ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया है. आज हम आपको ऐसे ही एक चाय वाले की कहानी बताने जा रहे है जो चाय बेचने के साथ-साथ अपने सपनो को भी साकार करता है.

ये चायवाला है देश की राजधानी दिल्ली के हिन्द भवन के बाहर बैठने वाले लक्ष्मण राव. लक्ष्मण काफी सालो से यहाँ चाय की दुकान लगाते है. और चाय बेचने के साथ-साथ ये अब तक करीब 24 किताबे भी लिख चुके है. और इनमे से करीब 12 किताबे अब तक प्रकाशित हो चुकी है. साथ ही इनमे से 6 किताबो का प्रकाशन दो बार हुआ है. वही लक्ष्मण राव की 5 किताबे अभी भी प्रकाशन प्रक्रिया में ही है.

लक्ष्मण का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था. वो पिछले 40 सालो से साहित्य क्षेत्र में सेवा कर रहे है. इस बारे में लक्ष्मण का कहना है कि, 'साहित्य मेरा शौक है और चाय बेचना मेरा रोजगार. इसलिए मै जहां चाय बेचता हूँ वहीं पर अपनी किताबें भी बेचता हूँ.' लक्ष्मण जब छोटे थे तो वे एक बार गांव में अपने दोस्त के साथ नहाने गए थे. तब उनका दोस्त नदी में गया लेकिन कभी वापिस नहीं आया. लक्ष्मण ने इस घटना के बाद कुछ लिखने का मन बना लिया. उन्होंने अपने दोस्त रामदास के नाम पर ही पहली कहानी लिखी जो कि बाद में किताब में तब्दील हो गई. लक्ष्मण गुलशन नंदा को अपना गुरु मानते है. लक्ष्मण देश की पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से भी सम्मानित हो चुके है.

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