कोरोना: प्याज़ मंडी में मजदूरों की किल्लत, दाम में हो सकता है इजाफा

कोरोना: प्याज़ मंडी में मजदूरों की किल्लत, दाम में हो सकता है इजाफा

वाशिंगटन: कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान एक ओर लोग अफरा-तफरी में खरीददारी कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मंडियों में मजदूर ही उपलब्ध नहीं हैं. ऐसी ही खबर आ रही है नासिक से, जहां काम के लिए कोई मजदूर नहीं होने की वजह से लासलगांव में प्याज की मंडियां 26 मार्च से ही बंद हैं. बंदी होने के कारण बाजार पहले से ही प्रभावित है. यदि प्याज का बाजार बंद रहता है, तो इसका सीधा प्रभाव प्याज की आपूर्ति पर पड़ेगा. प्याज की आपूर्ति प्रभावित होगी तो इसकी कीमतों में वृद्धि होगी.

विनचूर एग्रीकल्चर मार्केट के डायरेक्टर सोमनाथ शिरसाठ ने कहा कि, "लॉकडाउन के कारण मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं. हम चाहते हैं कि मजदूर काम पर आएं, किन्तु पुलिस उन्हें आने नहीं दे रही है. ड्राइवर मौजूद नहीं हैं. जो लोग बाहर थे वे अब वापस नहीं आ पा रहे हैं. सरकार बाजार को खुले रहने के लिए कह रही है, किन्तु ऐसे परिदृश्य में हमारे पास कोई विकल्प नहीं है."

उन्होंने कहा कि, "किसान अपनी प्याज की उपज को बाजारों में लाए और 10 से 14 रुपये प्रति किलो तक के दाम पर बेचा. मगर शहरों से मांग कम हो गई और शहरों में ले जाने के लिए कोई साधन भी मौजूद नहीं थे."  लासलगांव के एक किसान निवारुति न्याहरकर ने बताया कि "पहले हम बेमौसम बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुए थे और अब कोरोना के कहर के चलते हमारी उपज बाजारों में पड़ी रहेगी. लाल प्याज कुछ दिनों में खराब होने लगती है. इससे हम पर बहुत बुरी मार पड़ेगी."

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