‘कभी ख़ुशी, कभी गम’ में असर डाल रही शराबबंदी

पटना: बिहार में 5 अप्रैल से लागू पूर्ण नशाबन्दी का असर अब धीरे धीरे बढने लगा है. चाहे खुशी का मौका हो या गम का. शराबबंदी होने से जहाँ शादियों का उत्साह जाता रहा, वहीँ मृत्यु के मौके पर सामाजिक रीति रिवाज अनुसार शराब की अनिवार्यता से अंतिम संस्कार तक प्रभावित हो रहे हैं. हालाँकि ‘मूड’ बनाने वाले अन्यत्र जाकर अपनी इच्छापूर्ति कर रहे हैं|

यूपी में भरौली सीमा की देशी शराब दुकान से 200 मिली की एक दर्जन शराब की बोतलें ले जा रही बिहार बक्सर की रहने वाली  बुजुर्ग महिला माया खारवाह को पुलिस ने रोक लिया. वह पुलिस कर्मियों के पैरों में गिरकर रोते हुए कहने लगी यह शराब उसे साथ ले जाने दे, ताकि परिवार में हुई एक मौत के बाद जन जातीय समाज के तहत अंतिम संस्कार कर सके. धार्मिक कारणों से मौत के बाद की परम्पराओं को पूरा करने हेतु वह शराब ले जा रही थी|

वहीँ, दूसरी ओर कई युवा एवं मध्यम आयु वर्ग के लोग बिहार की सीमा पार यूपी की देशी शराब की दुकानों पर पहुँच रहे थे. शादी की पार्टियों में अपना ‘मूड’ बनाने के लिए लोग यहाँ आ रहे हैं. छपरा से 12 किमी दूर बलिया में स्थानीय दुकानदारों ने बताया शादी के दिन रात 10 बजे तक सडक के किनारे शराब की खाली बोतलें और बियर की कैन से पट जाते हैं. बिहार में शराब बंदी के बाद से यूपी के बलिया, गाजीपुर और चंदौली की सीमा में शराब की खपत बढ़ गई है|

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