मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम में भारत औपचारिक तौर पर होगा शामिल

नई दिल्ली : आज भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम में औपचारिक तौर पर शामिल होने वाला है. गौरतलब है कि विश्व के चार महत्वपूर्ण परमाणु टेक्नोलॉजी निर्यात करने वाले देशों के ग्रुप में एमटीसीआर की एक अहम भागीदारी है. साथ ही इसे परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह में शामिल होने की कोशिश की नाकामी के बाद और भी बेहतर बताया जा रहा है. बता दे कि पिछले साल ही भारत के द्वारा एमटीसीआर की सदस्यता के लिए आवेदन पेश किया गया था.

इस मामले में ही यह बात भी सामने आई है कि विदेश सचिव एस जयशंकर फ्रांस, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग के राजदूतों की मौजूदगी में क्लब में शामिल होने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने वाले है. साथ ही यह भी सुनने में आया है कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के द्वारा एनएसजी की सदस्यता न मिलने को नाकामी मानने से इनकार किया गया है, और साथ ही यह भी कहा गया है कि इस मामले में अपेक्षित परिणाम नहीं प्राप्त हुए है.

सूत्रों का यह कहना है कि एमटीसीआर में शामिल होने के बाद ही भारत दो अन्य समूहों ऑस्ट्रेलियन ग्रुप और वास्सेनार एग्रीमेंट में शामिल होने को लेकर भी कोशिश को आगे बढ़ाने वाला है. यहाँ पर एनएसजी की सदस्यता के लिए भी कोशिश को जारी रख जाना है. विकास स्वरुप ने यह भी बताया है कि सोमवार को भारत एमटीसीआर का पूर्ण रूप से सदस्य बन जाने वाला है.

एमटीसीआर का मुख्य मकसद मिसाइलों के प्रसार को प्रतिबंधित करना, रॉकेट सिस्टम को पूरा करने के अलावा मानव रहित जंगी जहाजों पर 500 किलोग्राम भार के मिसाइल को 300 किलोमीटर तक ले जाने की क्षमता वाली तकनीक को बढ़ावा देना बताया जा रहा है. इसके अलावा बड़े विनाश वाले हथियारों और तकनीक पर पाबंदी लगाने को भी अहम मकसद बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि एमटीसीआर में कुल 34 प्रमुख मिसाइल निर्माता देश शामिल हैं.फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका , इटली और कनाडा इसके संस्थापक सदस्य रहे हैं. बुल्गारिया को वर्ष 2004 में इस समूह का सदस्य बनाया गया था. जबकि इसके बाद से किसी नए देश को इसका मौका नहीं मिला. बता दे कि अभी तक चीन और पाकिस्तान इस विशेष समूह के सदस्य नहीं हैं.

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