पाकिस्तान के विरोध पर अन्य देशों को रखना होगा साथ

वाॅशिंगटन : दक्षिण ऐशिया के विशेषज्ञ तक मानने लगे हैं कि भारत को आतंकवाद और अन्य मसलों पर पाकिस्तान का विरोध करने और इस मसले पर अपनी लड़ाई लड़ने के लिए अन्य देशों की आवश्यकता है। इनका मानना है कि यदि दूसरे देश भारत को सहयोग नहीं देते हैं तो फिर पाकिस्तान अपनी गतिविधियों को जारी रखेगा। दरअसल इनिशिऐटिव आॅन द फ्यूचर आॅफ इंडिया एंड साउथ एशिया की निदेशक अपर्णा पांडे ने इस मामले में अपनी बात कही। वे थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्युट में दक्षिण एशिया में भारत से संबंधित मामलों की निदेशक के पद पर हैं।

दरअसल उनहोंने अपनी बात कार्नेगी एंडोमेंट फाॅर इंटरनेशनल पीस के जाॅर्ज पेरकोविच और टोंबी डाल्टन की पुस्तक नाॅट वार, नाट पीस मोथ्टवेटिंग पाकिस्तान टू प्रिवेंट क्राॅस बाॅर्डर टेरेरिज्म के विमोचन पर उपस्थितों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा है कि भारत अकेले पाकिस्तान के रवैये को बदल नहीं सकता है। उसे अपनी बात दम से रखने के लिए अन्य देशों की आवश्यकता है।

उनका कहना था कि विश्व भारत के साथ नहीं आती है तब तक पाकिस्तान भारत का विरोध करता रहेगा और उसके खिलाफ अपने हथकंडे चलेगा। दरअसल पाकिस्तान से जुड़ी बातों को लेकर उन्होंने विशेषज्ञों के पैनल से चर्चा की। अपर्णा ने इस मामले में तर्क दिया कि भारत द्वारा नीतियां तैयार किए जाने के बाद पाकिस्तान ने अपने पक्ष को भुनाने के लिए नई दिल्ली को लेकर काल्पनिक हौव्वा बना दिया। जब तक यह बात समाप्त नहीं होगी

भारत अपनी बात पुरजोर तरीके से नहीं रख पाएगा। इन बातों के समाप्त होने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत को मजबूत होना होगा अर्थात् विश्व के अन्य देशों को भारत के साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान को यह पूरी तरह से लगने लगेगा कि वह वैश्विक स्तर पर अलग थलग हो गया है तो शायद उसकी सेना नए सिरे से भारत को लेकर अपने रवैये पर विचार करेगी। इसके बिना पाकिस्तान की सेना को अन्य माध्यम से मजबूर नहीं किया जा सकता है कि वह इस ओर ध्यान दे।

पाकिस्तान की मजबूरी है कि वह भारत को परमाणु हमले की धमकी देता रहे और राष्ट्रवाद का दिखावा करे। उनहोंने भारत पाकिस्तान के विवाद के लिए पाकिस्तान की सेना को जवाबदार बताया। अपर्णा का कहना था कि भारत पाकिस्तान के संबंध में जब युद्ध और शांति दोनों में से कोई बात नहीं होती है तो पाकिस्तान की सेना को सीधा फायदा मिलता है।

अर्थात जब युद्ध नहीं होता है तो पाकिस्तान की सेना लड़ती नहीं है और जब संघर्ष के लिए पाकिस्तान की सेना मजबूर कर देती है तो सेना का महत्व रहता है। ऐसे में पाकिस्तान की सेना अपने देश में अपना महत्व रखती है। मगर उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना की सोच को बदलने के लिए विश्व के अन्य देशों को भारत के साथ लाना होगा।

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