क्या करे जब बच्चा ज़िद्दी हो जाये

अक्सर माँ की ये शिकायत होती है की उनका बच्चा बचपन में तो उनका कहना मानता था, पर थोड़े बड़े जाने के बाद जिद्दी हो गया है. अमुमन हर माँ को कभी न कभी इस स्थिति का सामना करना पड़ता है .कई बार स्तिथी बहुत विकट हो जाती है और माँ बाप को अन्य लोगो के सामने बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है . ऐसी स्थिति से बचने के लिये निम्न उपाय अपनाये .

क्या करे जब बच्चा ज़िद्दी हो जाये :- 

1 बच्चे अक्सर आपका ध्यान उनकी तरफ आकर्षित करने के लिये ज़िद्दी हो जाते है. बच्चों को आप समुचित प्यार और समय दें तो बच्चे ज़िद्दी नहीं होंगे .

2 एक बात बच्चो के बचपन से ही मन में बिठा दें, के उनकी केवल जायज़ मांग ही सुनी जाएगी. एक बार किसी बात पर न कहने से दुबारा हाँ होना नामुकिन है. ये बात उनके अंतर मन में उतरने की ज़िमेदारी आपकी है .

3 सबसे अहम् बात चीलाकर या जिद्द कर कोई भी बात बच्चे आपसे नहीं मनवा सकते है, इस बात की बच्चो के मन पर गहराई से छाप पड़नी चाहिये. बच्चों को उनकी बात हमेशा तेहेज़ों तमीज़ से और जायज़ बातों पर ही आपकी हामी मिलेगी, इस बात की छाप बच्चे के मन पर जितनी ज़्यादा गहरी होगी आपकी परवरिश उतनी उम्दा होगी .

4 एक आदर्श पालक होने के नाते आपको प्रेम और अनुशासन के बीच संतुलन बनके रखना होगा. 

5 अगर आप बच्चो से अच्छे व्यवहार की अपेक्षा रखते है, तो सर्वप्रथम आपस में अपने पारिवारिक जीवन में आदर्श व्यवहार करे. बच्चे अनुकरणप्रिय होते है, अगर आप सम्मान, धीरज, शालीनता का व्यवहार करेंगे तो वो भी यही व्यवहार में लाएंगे . इसका उल्टा भी उतना ही आसानी से व्यवहार में आएगा .

6 बच्चो को बाहर के दूषित वातावरण से दूर रखे, उनका वास्तविकता और व्यवहारिकता से परिचय करवाये पर घर और  बाहर में क्या अंतर है और संतुलन कैसे बनाना है ये बता दें.

7 बच्चो को अच्छी संगति के प्रभावों से परिचित करवाये, उन्हें मित्र किसे कहते है, और मित्र धर्म क्या है, अच्छा मित्र कैसे बनते है , और अच्छा मित्र के लक्षण क्या है, इस सत्य को समझाये . और उनके स्वयं के अनुभवों से उनका ज्ञान बढ़ाये.

8 बच्चो को अच्छा साहित्य पढ़ने को दें, उनके रूचि अनुसार उनके योग्यता परखे और उस दिशा में आगे बढ़ाये . अगर उनकी रूचि संगीत, चित्रकला, नृत्य में है तो उनकी ऊर्जा उस क्षेत्र विशेष में पलवीत करे.

9 खाली दिमाग शैतान का घर ये बात बच्चो पर बहुत सटीक बैठती है ,बच्चो को खाली न बैठने दें, उन्हें पढ़ाई के आलावा उनके रुचिकर विषय में और सृजनशील कार्यो में उनका ध्यान लगाये .  

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