हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से माँगा विज्ञापन पर खर्च का हिसाब

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइंस  के उल्लंघन पर चिंता जाहिर करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने आप सरकार के सीएम अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के गुणगान करने वाले प्रचार पर अब तक किए गए खर्च का ब्योरा मांगा है. चीफ जस्टिस जी रोहिणी और जस्टिस जयंत नाथ की बेंच ने बुधवार को यह आदेश दिया. इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी. कांग्रेस नेता अजय माकन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर अदालत ने यह आदेश जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार टैक्सपेयर्स के पैसे को नेताओं की इमेज चमकाने पर खर्च नहीं किया जा सकता. वहीँ केजरीवाल सरकार ने पिछले कुछ दिनों में टीवी, प्रिंट और रेडियो पर सरकार से जुड़े कामकाज के प्रचार के लिए काफी विज्ञापन जारी किए हैं जिसका राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं.

कोर्ट की ओर से जारी नोटिस में सरकार से कहा कि वह 13 मई 2015 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सरकार की ओर से जारी विज्ञापन के सोर्स और उस पर किए गए खर्च का ब्योरा 3 अगस्त 2015 तक देने को कहा है. कोर्ट ने दिल्ली सरकार की एक्टिविटी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हर किसी पर लागू होता है.

कोर्ट ने दिल्ली सरकार से यह भी पूछा कि वह चेन्नई, मुंबई जैसे शहरों में पैसे कैसे और क्यों खर्च कर रही है? दिल्ली सरकार के वकील रमण दुग्गल ने कहा कि विज्ञापनों पर पार्टी फंड से पैसे खर्च किए जा रहे हैं.

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