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'मुस्लिम थे, इसलिए पाकिस्तान चुन लिया, दादा ने सबसे बड़ी गलती की..' अली ने तिरंगे के साथ फोटो डाल बयां किया दर्द
'मुस्लिम थे, इसलिए पाकिस्तान चुन लिया, दादा ने सबसे बड़ी गलती की..' अली ने तिरंगे के साथ फोटो डाल बयां किया दर्द

इस्लामाबाद: 1947 में भारत से अलग होकर इस्लामी मुल्क बना पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक तंगी, राजनितिक अस्थिरता और अपने द्वारा ही पाले-पोसे गए आतंकवाद से बुरी तरह जूझ रहा है। इन तमाम मुश्किलों का जिम्मेदार खुद पाकिस्तान और उसका कट्टरपंथ ही है, जिसकी बुनियाद पर उस देश का जन्म हुआ था। लेकिन, अब भी पाकिस्तान अपनी हरकतें छोड़ने को राजी नहीं है, उसकी इन्ही हरकतों के कारण पाकिस्तान के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मोहम्मद शायन अली (Shayan Ali) को अपना मुल्क छोड़ना पड़ा है। दरअसल, पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI के इशारों पर नाचने से इनकार करने के बाद मोहम्मद शायन अली को अपनी हत्या का डर सता रहा था। पाकिस्तान छोड़ने के बाद अली सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अपना दर्द साझा कर रहे हैं। ऐसे ही एक पोस्ट में उन्होंने कहा है उनके दादा-दादी ने भारत के स्थान पर पाकिस्तान को चुनकर सबसे बड़ी गलती की थी।

 

शायन ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, 'पाकिस्तान जैसी कोई चीज ही नहीं है। पाकिस्तान की स्‍थापना मजहब के आधार पर की गई थी न कि इसलिए कि विश्व को इसकी आवश्यकता थी। मेरे दादा-दादी ने भारत की जगह पाकिस्तान को केवल इसलिए चुना क्योंकि वे मुसलमान थे। पाकिस्तान जाना मेरे दादा-दादी की सबसे बड़ी गलती थी।' इस पोस्ट के साथ शायन ने तिरंगे के साथ अपनी तस्वीर भी पोस्ट की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि, 'अगर मैं पाकिस्तान के बजाय भारत में होता तो मुझे सुरक्षा मसलों के कारण अपना मुल्क नहीं छोड़ना पड़ता। मुसलमान और हिंदू कभी दुश्मन नहीं थे। कुछ असामाजिक लोग थे, जो इन दोनों समुदायों को अलग करना चाहते थे। कुछ बाहरी शक्तियां ‘अखंड भारत’ को देखकर डर गईं। दुर्भाग्य से, वे एक सुंदर और शायद सबसे ताकतवर राष्ट्र को विभाजित करने में सफल भी रहीं।' 

 

बता दें कि, अली ने एक देश के रुप में भी पाकिस्तान के अस्तित्व को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि एक देश की अपनी संस्कृति होती है। मगर, 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्‍तान की पूरी संस्‍कृति केवल भारतीय संस्कृति की नकल ही थी। जिन्होंने जमीन के टुकड़े किए उनमें अपनी संस्कृति का निर्माण की योग्यता नहीं थी। वे केवल हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच द्वेष फैलाना चाहते थे। बता दें कि, अली खुद को पीएम नरेंद्र मोदी का फैन बताते हैं। उन्हें हनुमान चालीसा भी कंठस्थ है। 

इससे पहले उन्होंने ट्विटर पर ‘पाकिस्तान छोड़ने की मेरी कहानी’ शीर्षक से एक पोस्ट शेयर कर अपनी आपबीती बताई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि, 'मैंने पाक फ़ौज के PR विंग के कश्मीर से जुड़े एक म्यूजिक वीडियो (भारत के खिलाफ नफरत वाला) में जब काम करने से इंकार कर दिया, तो उन्होंने मुझ पर मेरे सुनहरे बालों की वजह से भारत की खुफिया एजेंसी RAW का जासूस और यहूदी एजेंट होने का इल्जाम लगाया। मैं खुशकिस्मत था कि मैंने पाकिस्तान को सुरक्षित छोड़ दिया, मगर फिर भी आतंकवादी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के खिलाफ मेरा संघर्ष कभी ख़त्म नहीं हुआ।'

बता दें कि, पाकिस्तान चुनने को अपने पुरखों की गलती बताने वाले शायन अली अकेले नहीं हैं। हाल ही में पाकिस्तान की मशहूर पत्रकार आरजू काजमी (Arzoo Kazmi) ने भारत छोड़ पाकिस्तान में बसने के पूर्वजों के फैसले पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा था कि दादा जी ने हमारी वाट लगा दी। अपने ट्वीट में काजमी ने लिखा था कि, 'मेरे भाइयों और बाकी परिजनों को लगता है कि उनका पाकिस्तान में कोई भविष्य नहीं है। मेरे दादाजी और उनका परिवार बेहतर भविष्य के लिए प्रयागराज और दिल्ली से पाकिस्तान चला आया था। वाट लगा दी दादा जी।'

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