लॉकडाउन के बीच संकट में है मछुआरों की रोजी-रोटी

बिलासपुर: आज के समय में बीमारी हो या कोई आपदा दोनों ही मानव जीवन पर संकट बन ही जाती है. जिसमे से एक है कोरोना वायरस यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका अभी तक कोई तोड़ नहीं मिल पाया है. वहीं सरकार के द्वारा जारी किए गए लॉक डाउन के नियम के बाद  प्रदेश के करीब 10 हजार मछुआरों पर रोजी रोटी का संकट मंडरा रहा है. बाजार में न के बराबर मांग होने के कारण मछली व्यवसाय ठप हो गया है. गोबिंद सागर सहित अन्य स्थानों में मछलियों की भरमार होने के बावजूद मछुआरों के चेहरे मुरझा गए हैं. स्थानीय बाजारों में भी मछली की मांग कुछ ज्यादा नहीं है. बिलासपुर में ही करीब 2500 परिवारों की रोजी रोटी मछली व्यवसाय से चलती है. लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण इनकी आर्थिकी बिगड़ गई है. 

लॉकडाउन की वजह से झील से मछली उत्पादन पिछले लगभग डेढ़ महीने से रुका हुआ था. जिसे 20 अप्रैल को जिला प्रशासन ने शुरू करवाया है. जिले में मछली पकड़ने के लिए सात केंद्र बनाए गए हैं. जिनमें भाखड़ा केंद्र की मछली पंजाब भेजी जाती है. बाकी केंद्रों से प्रदेश के शिमला, ऊना, कांगड़ा, मंडी, धर्मशाला और सोलन भेजी जाती है.

लॉकडाउन के बाद झील से मछली उत्पादन पूरी तरह बंद होने से जिले के मछुआरों की कमर टूट गई है. जल में मछलियों की भरमार है मगर मछुआरों के परिवारों पर खाने पीने का अकाल पड़ गया है. सराज अख्तर, अनीम, दानिश, मुकेश का कहना है कि सरकार प्रदेश भर के मछुआरों के लिए भी पैकेज का ऐलान करे.  किसानों की तर्ज पर मछुआरों के लिए भी प्रदेश सरकार राहत राशि सीधे बैंक खातों में जमा करें. जिससे मछुआरों के परिवार की आर्थिक व्यवस्था में सुधार आ सके. मार्च 31 तक मछली के रेट ठीक मिलते थे, लेकिन लॉकडाउन से सब खत्म हो गया.

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