रसगुल्ले पर फिर मचा बवाल, दो राज्यों ने किया दावा

नई दिल्ली : एक ओर नेताओं और बाबा रामदेव द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की जा रही है तो दूसरी ओर मिठाईयों की मीठी लड़ाई भी छिड़ गई है। आखिरकार मिठाईयों में स्वाद और मिठास में राजा कौन सी मिठाई है। इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग रसगुल्ले को राष्ट्रीय मिठाई घोषित करने की मांग कर रहे हैं। यही नहीं इस मिठाई को लेकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के अलग - अलग दावे हैं। राज्यों में इस बात को लेकर विवाद गहरा गया है कि आखिर रसगुल्ला कहां की मिठाई है। देश के दो राज्य ओडिशा और बंगाल में इस बात को लेकर विवाद हो गया है।

दोनों ही राज्य एक दूसरे से दावा कर रहे हैं। ओडिशा की तीन कमेटियों द्वारा रसगुल्ले को लेकर एक रिपोर्ट पेश की गई है। जिसके अनुसार यह कहा गया है कि करीब 600 वर्ष से राज्य के मठ-मंदिरों में रसगुल्ले का नैवेद्य लगाया जा रहा है। राज्य के साईंस और तकनीकी मंत्री पाणिग्रही ने कहा कि रसगुल्ले को भोग के तौर पर अर्पित किए जाने को लेकर हमारे पास सबूत हैं।

दूसरी ओर ओडिशा की ओर से यह कहा गया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में प्रयोग होने वाली पुस्तक मडला पंजी में रसगुल्ले का उल्लेख है। यही नहीं सरला दास की पुस्तक दांडी रामायण व महाभारत में भी इसका उल्लेख मिलता है। रसगुल्ले का स्वाद आदि शंकराचार्य ने भी चखा है। वे जब जगन्नाथ मंदिर पहुंचे तो उन्हें भी रसगुल्ला भेंट किया गया था।

बहरहाल रसगुल्ले पर उपजे इस विवाद को लेकर एक माह में तीन कमेटियां अपना जवाब प्रस्तुत करेंगी। इन कमेटियों की रिपोर्ट के बाद ही दोनों राज्यों की दावेदारी पर कोई निर्णय हो पाएगा। उल्लेखनीय है कि रसगुल्ले को प्रांत विशेष की मिठाई बताने का विवाद अगस्त में ओडिशा से ही प्रारंभ हुआ था। जिसके बाद ओडिशा ने इस पर जीआई हासिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया प्रारंभ की। इसे लेकर तीन कमेटियां बनाई गईं। 

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