जिन्होंने देश के खातिर चूम लिया फांसी का फंदा

Mar 22 2015 01:12 PM
जिन्होंने देश के खातिर चूम लिया फांसी का फंदा
देश की आजादी के लिये अपना जीवन न्यौछावर करने वाले शहीद भगत सिंह और उनके साथी राजगुरू व सुखदेव को आज 23 मार्च के ही दिन फांसी के फंदे पर लटकाया गया था। शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव आजादी के दीवाने थे, जिन्होंने देश के खातिर हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। शहीदों को 23 मार्च 1931 के दिन फांसी की सजा दे दी गई थी।
 
इस देश की आजादी में न जाने कितने लोगों ने बलिदान दिया है। देश के स्वाधीनता इतिहास के पृष्ठों को यदि पलटकर देखा जाये तो जिस तरह से भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबवाये और चकमा दिया, ऐसे बिरले ही लोग आजादी के दीवाने देखने को मिलते है। न वे अंग्रेजों से डरे और न झुके, बस भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का ही इनका स्वप्न था। 
 
इतिहास गवाह है कि 23 मार्च 1931 को भगत सिंह के साथ ही सुखदेव व राजगुरू को भी फांसी की सजा दे दी  गई थी। इतिहासकारों ने उल्लेख किया है कि शहीदों की फांसी की सजा पर अंग्रेजों ने 14 फरवरी 1931 को ही मुहर लगा दी थी। जिस वक्त भगत सिंह को फांसी दी गई, उस वक्त वे मात्र 23 वर्ष के ही थे। भगतसिंह के बारे में कई बातें अनछुई है, लेकिन सबसे बड़ी बात उनकी देश भक्ति, निडरता और आजादी पाने का संकल्प रही। आज शहीद दिवस पर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित होकर उनकी शहीदी को नमन है।