भगवान् के दर पर जिंदगी मांग रहा था, मिली मौत

दुमका: भारत में एक ओर जहां तकनीक नित नई ऊंचाइयों को छू रही है, वहीं एक तबका अभी भी अन्धविश्वास के अन्धकार में जी रहा है या यूँ कहें की वो इस तरह जीने को मजबूर है, क्योंकि देश का प्रशासन उसे शिक्षा और चिकित्सा जैसे बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है. इसी कारण एक झारखण्ड के एक नवयुवक को अपनी जान गंवानी पड़ी, जिसने अभी जीना पूरी तरह से शुरू भी नहीं किया था, उसे मौत ने निगल लिया. 

एक युवक जो बाबा बासुकीनाथ के मंदिर में असाध्य बीमारी ठीक होने की मन्नत मांग, धरने पर बैठ गया था, उसकी सोमवार तड़के करीब तीन बजे मौत हो गई. मरने वाला युवक जगजीत कुमार सिंह (19) देवघर के चितरा थाना के तालझारी गांव का निवासी था. उसके पिता गंभीर सिंह, माता रंजू देवी और नानी भी युवक की बीमारी ठीक होने की प्रार्थना को लेकर भगवान के दर पर धरना दे रहीं थीं.

लेकिन इस युवक को भगवान के दर पर भी, जीवन की भीख नहीं मिली, वहीं युवक के पिता ने बताया कि वे लोग 21 अप्रैल से इस मंदिर पर धरना दे रहे थे क्योंकि उनके बेटे को असाध्य बीमारी थी, साथ ही उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे, कि वे लोग किसी बड़े अस्पताल में जाकर अपने बेटे का इलाज करा सकें, इसके लिए उन्होंने प्रशासन से भी गुहार लगाई थी, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली. आपको बता दें कि बासुकीनाथ धाम में कामना की पूर्ति के लिए धरना देने की परंपरा वर्षों पुरानी है, भक्त मानते हैं कि बासुकीनाथ धाम में संयम और नियम पालन के साथ धरना देने से कामना पूरी होती है. अभी भी वहां करीब 100 लोग धरने के लिए बैठे हैं. 

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