आज काशी में मंदिर बचाओ आन्दोलन का दसवाँ दिन

काशी विश्वनाथ परिसर में शासन-प्रशासन अविवेकपूर्ण रवैया अख्तियार करके विश्वनाथ कारिडोर के नाम पर मंदिर परिसर सहित आसपास पौराणिक मंदिरों को तोड़ा रहा है।  मन्दिर सनातनी परंपराओं को मानने वाले लोगो की आस्था का केन्द्र हैं । मन्दिरों को तोड़ने और उसका स्थान बदलने की कोशिश करने वालों को काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिता के लिये डोमराज परिवार अग्नि नहीं देने का निर्णय लिया है । यह बात शनिवार को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंन्द सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्व में मंदिर बचाओ आन्दोलनम के दसवें दिन मीरघाट पर आयोजित जनसंवाद में काशी के डोमराजा के  वंशज विश्वनाथ चौधरी ने कही।  उन्होने चेतावनी के लहजे में कहा कि यदि विकास के नाम पर काशी की विरासत के छेडछाड और मंदिरों को ध्वस्त किया गया तो काशी की जनता सडकों पर संघर्ष के लिए बाद्धय होगी।  
 
इस अवसर पर स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती  ने कहा कि जहां मंदिरों में पूजा-अर्चना नही होती है वहां रोजी रोटी का संकट,  आधि-व्याधि का संकट और मृत्यु का संकट मंडराने लगता है, इसलिए काशी के इन मंदिरों को तोड़े  जाने  और मंदिर में पूजा बंद कराया जाने  का खतरा मंडराने लगा है । जनसंवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता बरिया चौधरी ने किया।  
इस अवसर पर राजेंद्र चौधरी, सत्यम चौधरी, रोशन यादव, मनाऊँ यादव, सोनू चौधरी,हरेंद्र शुक्ला सहित कई  लोगों ने विचार व्यक्त किया।  संचालन राजनाथ तिवारी ने किया।
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