चारोली एक अद्धभुत औषधी

चिरौंजी  या चारोली पयार या पयाल नामक वृक्ष के फलों के बीज की गिरी है जो खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है। इसका प्रयोग भारतीय पकवानों, मिठाइयों और खीर व सेंवई इत्यादि में किया जाता है।[1] चारोली वर्षभर उपयोग में आने वाला पदार्थ है जिसे संवर्द्धक और पौष्टिक जानकर सूखे मेवों में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

चिरौंजी दो प्रकार की वस्तुओं को कहते हैं एक तो जो मंदिर में प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है वह है चिरौंजी दाना। और दूसरी है वह मिलती है हमें एक वृक्ष के फलों की गुठली से। जो फलों की गुठली फोड़कर निकाली जाती है। जिसे बोलचाल की भाषा में पियाल, प्रियाल या फिर चारोली या चिरौंजी भी कहा जाता है।

चिरौंजी का रासायनिक विश्लेषण : 

चिरौंजी में 3।0% नमी, लिपिड / वसा (59।0%), प्रोटीन (19।0-21।6%), स्टार्च / कार्बोहाइड्रेट (12।1%), और फाइबर (3।8%) होता है। इसमें खनिज जैसे की कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा और विटामिन जैसे थायामिन , एस्कॉर्बिक एसिड / विटामिन सी, राइबोफ्लेविन, नियासिन आदि होते है।

चिरोंजी के फायदे - 

1  चिरौंजी बीज, में करीब 50% से अधिक तेल होते हैं, जो की चिरौंजी का तेल नाम से जाना जाता है और उसका प्रयोग कॉस्मेटिक और चिकित्सीय उद्देश्य से किया जाता है।

2  चिरौंजी का तेल प्रजनन प्रणाली से संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए एक कारगर उपाय है। यह कामोद्दीपक है | 

3  चिरौंजी का तेल दर्द, खुजली, प्रिकली हीट, तथा अन्य त्वचा समस्याओं में भी फायदेमंद है। इसे आमवाती सूजन और जोड़ों के दर्द में दर्द वाले हिस्सों पर लगाया जाता है।

4  इस तेल को गर्दन की ग्रंथियों की सूजन को कम करने में बाहरी रूप से लगाया जाता है।

5  चिरौंजी का तेल गंजे पन में सिर पर मलते है। इससे गंजे सर भी बाल उग आते है |

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