चीनी घुसपैठ के बाद सेना ने दिखाया दम, सीमा पर उतारा ग्लोबमास्टर

मेचुकावे दिन बीत गए जब चीन हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा लगाते हुए भारतीय सीमा में दाखिल हो जाता था और भारत को युद्ध में पस्त करने का माद्दा रखा करता था अब तो गगनभेदी ध्वनि और अग्नि की उड़ान चीन को तो क्या योरप के कई देशों को भारतीय शक्ति पर सोचने के लिए मजबूर कर देती है। जीहां, अग्नि की उड़ान। आपने यह शब्द ठीक तरह से पढ़ा। अग्नि की उड़ान ही तो है भारत के बोईंग सी-17 का उड़ना। जी हां, सी-17 ग्लोबमास्टर विमान इस विमान शक्ति का पूरा नाम है।

भारत का यह अभी तक का सबसे बड़ा विमान है और दुश्मन इसकी उड़ान से थर-थर कांपता है। हाल ही में चीन के कदम के बाद इस विमान की सफल लैंडिंग चीन सीमा से करीब 29 किलोमीटर दूर अरूणाचल प्रदेश के मेचुका क्षेत्र में हुई थी। इस क्षेत्र से रेल और सड़क संपर्क बेहद दूर है। इतना ही नहीं विमान आपात स्थिति में रसद, सैन्य सामान और अन्य सुविधाऐं पहुंचाने में सक्षम है। ग्लोबमास्टर की सफल लैंडिंग से इस क्षेत्र में सुरक्षाबलों व सैन्य सामान को तेजी से उंचे क्षेत्रों में पहुंचाया जा सकता है। इस विमान ग्लोबमास्टर की लैंडिंग ऊंचे क्षेत्रों में एयरफोर्स की सामरिक शक्ति की परीक्षण की दिशा में व्यापक प्रयास किए गए हैं।

वायुसेना के समीप एएन 32 और सी 130 जे जैसे विमानों की लैंडिंग क्षमता दी गई है। सी - 17 ग्लोबमास्टर की लैंडिंग कई कठिन क्षेत्रों में तक की जा सकती है। संकट के समय यह विमान बेहद उपयोगी है। अरूणाचल प्रदेश जिस पर चीन की नज़र हमेशा से रहती है और यहां के सीमा क्षेत्र में चीन अक्सर घुस जाता है वहां यह केवल 4200 फीट के लैंडिंग क्षेत्र में सफलता से लैंड कर चुका है।

यहां पर इस विमान की मौजूदगी से चीन के हौंसले तक पस्त हो गए हैं और उसे अपनी सेना को पीछे हटाना पड़ा है। यह विमान भारत को अमेरिका से मिला था। अमेरिकी सी-17 विमान में 150 सैनिकों को ले जाया जा सकता है। इस विमान में 70 टन का वजन ले जाया जा सकता है। यह वायुयान लगभग 2011 में वायुसेना में शामिल हुआ था।

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