दालों के बढ़ते दाम पर सरकार चिंतित

नई दिल्ली ​: दालों के दाम बढ़ना सरकार के लिए एक मुश्किल कर सकता है। दरअसल सरकार के पास दालों के दाम बढ़ने के कई कारण हैं मगर जनता इसे समझ नहीं पा रही है। इस मामले में केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि केंद्र सरकार दाल की कमी का हल खोजने में लगी है। वह ऐसे उपाय करने का प्रयत्न कर रही है जिससे राज्यों को सस्ती दर पर दाल उपलब्ध करवाई जा सके। इस मामले में पासवान ने पत्रकारों के एक सवाल पर कहा कि दाल के दाम बढ़ने के कई कारण हैं। पहला कारण यह है कि बीते 2 वर्ष के दौरान कम बारिश के चलते फसलें बर्बाद हुईं।

एक कारण यह है कि दालों का आयात कम कर दिया गया। उनका कहना था कि बीते साल देश में दाल का उत्पादन 171 लाख टन था। दूसरी ओर उसकी मांग 226 लाख टन रही। मगर इस बार दाल की खपत 236 लाख टन होने की संभावना जताई गई है। केंद्रीय मंत्री पासवान ने यह भी कहा कि दालों को विदेशों से आयात करने के मामले में निजी आयातकों ने आयात कम किया। दरअसल दाल आम लोगों की थाली तक बमुश्किल ही पहुंच सकी।

यह भी कहा गया कि दालों का बफर स्टॉक तैयार किया गया है। ऐसे कई रास्ते भी अपनाए गए हैं जिसमें यह दावा किया गया कि राज्य सरकार जिस तरह चाहे केंद्र सरकार उन्हें वैसी ही दाल उपलब्ध करवाए। इस मामले में राज्यों द्वारा अपील की गई है कि वे दाल को 120 रूपए प्रति किलोग्राम के दाम पर बेचने की व्यवस्था करें। उनका कहना था कि जनवितरण प्रणाली को लेकर उन्होंने कहा कि इस प्रणाली में भ्रष्टाचार है। उनका कहना था कि गरीब किसान की स्थिति और भूख के चलते होने वाली मौतों को सरकार रोकने का प्रयास करेगी। इसके लिए सरकार गंभीर भी है।

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