ब्रेस्ट कैंसर, कारण एवं पहचान

ब्रेस्ट कैंसर, कारण एवं पहचान

कैंसर के बारे में बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह बीमारी हमें नहीं हो सकती. इस चक्कर में वक्त रहते लोग जांच नहीं कराते और यही देरी इस बीमारी को घातक बना देती है.

वैसे तो ब्रेस्ट कैंसर के 100 में से 10 मामलों में ही अनुवांशिकता काम करती है, लेकिन कैंसर होने में जीन के बदलाव का 100 फीसदी हाथ होता है. जींस, एनवायरनमेंट और लाइफस्टाइल- ये तीन कारक मिलकर किसी के शरीर में कैंसर होने की आशंका को बढ़ाते हैं.

20 साल की उम्र से हर महिला को हर महीने पीरियड शुरू होने के 5-7 दिन बाद किसी दिन खुद ब्रेस्ट की जांच करनी चाहिए. ब्रेस्ट और निपल को आईने में देखिए. नीचे ब्रा लाइन से लेकर ऊपर कॉलर बोन यानी गले के निचले सिरे तक और बगलों में भी अपनी तीन उंगलियां मिलाकर थोड़ा दबाकर देखें. उंगलियों का चलना नियमित स्पीड और दिशाओं में हो. यह जांच अपने कमरे में लेटकर या बाथरूम में शॉवर में भी कर सकती हैं.

इस दौरान देखें कि ये बदलाव तो नहीं हैं :

1. ब्रेस्ट या निपल के साइज में कोई असामान्य बदलाव

2. कहीं कोई गांठ (चाहे मूंग की दाल के बराबर ही क्यों न हो) जिसमें अक्सर दर्द न रहता हो, ब्रेस्ट कैंसर में शुरुआत में आम तौर पर गांठ में दर्द नहीं होता.

3. कहीं भी स्किन में सूजन, लाली, खिंचाव या गड्ढे पड़ना, संतरे के छिलके की तरह छोटे-छोटे छेद या दाने बनना एक ब्रेस्ट पर खून की नलियां ज्यादा साफ दिखना.

4. निपल भीतर को खिंचना या उसमें से दूध के अलावा कोई भी लिक्विड निकलना.

5. ब्रेस्ट में कहीं भी लगातार दर्द.

यदि आपको थोड़ा भी संदेह हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर सलाह ले.