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नूंह शोभायात्रा पर हमला: हिंसा भड़काने के आरोप में कांग्रेस विधायक मम्मन खान गिरफ्तार, FIR कॉपी में देखें कैसे हुआ था हमला
नूंह शोभायात्रा पर हमला: हिंसा भड़काने के आरोप में कांग्रेस विधायक मम्मन खान गिरफ्तार, FIR कॉपी में देखें कैसे हुआ था हमला

चंडीगढ़: अगस्त में सावन सोमवार को नूंह में निकाली गई जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ के हमले में आरोपी बनाए गए हरियाणा कांग्रेस विधायक मम्मन खान को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। हरियाणा पुलिस के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद (VHP) की यात्रा के बाद हुई हिंसा में उनकी संलिप्तता के "पर्याप्त सबूत" थे।  फिरोजपुर झिरका के विधायक मम्मन खान ने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए मंगलवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और सुनवाई 19 अक्टूबर को होने वाली थी।

कांग्रेस नेता मम्मन ने दावा किया कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया जा रहा है, क्योंकि जिस दिन हिंसा भड़की थी उस दिन वह नूंह में मौजूद भी नहीं थे। हालाँकि, हरियाणा पुलिस ने कोर्ट को सूचित किया है कि कांग्रेस नेता को "सबूतों के उचित मूल्यांकन" के बाद आरोपी के रूप में नामित किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस के पास उनके मामले का समर्थन करने के लिए फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य सबूत हैं। मम्मन को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। बता दें कि, कांग्रेस विधायक मम्मन खान ने ही हरियाणा विधानसभा में धमकी दी थी कि, यदि मोनू मानेसर नूंह आया, तो उसे प्याज़ की तरह फोड़ देंगे। हालाँकि, मोनू नूंह नहीं गया, लेकिन उसी का नाम लेकर दंगाइयों ने शोभायात्रा में शामिल लोगों पर हमला कर दिया था। ऐसे में कांग्रेस विधायक मम्मन खान पर लोगों को भड़काने का भी आरोप है। 

इससे पहले विधायक को नूंह पुलिस ने जांच टीम के सामने पेश होने के लिए दो बार समन जारी किया था। हालांकि, कांग्रेस नेता मम्मन खान ने वायरल बुखार को कारण बताते हुए पुलिस के सामने पेश होने से इंकार कर दिया था। विधायक के वकील के अनुसार, खान को गुरुवार को ही FIR में आरोपी के रूप में अपना नाम शामिल किए जाने के बारे में पता चला। हाई कोर्ट में अपनी याचिका में, कांग्रेस विधायक खान ने हरियाणा सरकार को एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) बनाने के लिए निर्देश देने की भी मांग की थी, जिसमें पुलिस महानिरीक्षक पद से नीचे के अधिकारी शामिल न हों। 

उन्होंने अनुरोध किया कि हिंसा से संबंधित मामलों को SIT को स्थानांतरित कर दिया जाए, 'आगे आग्रह किया कि SIT स्वतंत्र रूप से काम करेगी।' बता दें कि, 31 जुलाई को, नूंह में VHP के नेतृत्व वाली जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने सुनियोजित तरीके से हमला कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप दो होमगार्ड सहित छह लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे।

नूंह शोभायात्रा पर किसने किया था हमला:-

31 जुलाई को सावन सोमवार के दिन हरियाणा के मेवात के नूंह में सैकड़ों मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने प्राचीन शिव मंदिर पर जल चढाने जा रही बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया था। दंगों के परिणामस्वरूप कम से कम छह लोग मारे गए थे, जिसमे दो होम गार्ड के जवान भी शामिल थे।  साथ ही दंगाइयों ने 80 से अधिक वाहनों में आग लगा दी थी, जिसमे पुलिस के वाहन भी शामिल थे। 

हिंसा के दौरान मौके पर तैनात ड्यूटी मजिस्ट्रेट अदीब हुसैन ने इसको लेकर एक FIR दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में अदीब हुसैन (FIR of Nuh Violence) ने जानकारी दी है कि वह मैनेजिंग ऑफिसर ओमबीर सिंह के साथ ड्यूटी पर मौजूद थे। इसी बीच एक समुदाय के 400-500 दंगाइयों ने श्रद्धालुओं और पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाज़ी और अवैध हथियारों से फायरिंग करना शुरू कर दिया। भीड़ का इरादा जान से मारने का था। दंगाइयों ने सरकारी और निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया। हमले के वक़्त हुसैन और ओमबीर सिंह नूहं बस स्टैंड पर मौजूद थे। उन्हें सूचना मिली थी कि सैकड़ों दंगाइयों ने 35-40 श्रद्धालुओं पर हमला कर उन्हें वार्ड क्रमांक 9 में स्थित राम मंदिर के अंदर बंधक बना लिया है।

अदीब हुसैन ने अपनी शिकायत (FIR of Nuh Violence) में बताया है कि दंगाई, श्रद्धालुओं को राम मंदिर परिसर से बाहर नहीं निकलने दे रहे थे। जब वे (हुसैन) मौके पहुँचे, तो 400-500 दंगाइयों ने लाठी, डंडे, पत्थर और अवैध हथियारों के साथ उन्हें मारने के लिए उन पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान अदीब हुसैन ने ओमबीर सिंह व अन्य पुलिस अधिकारियों को दंगाइयों को तितर-बितर करने के लिए उचित बल का इस्तेमाल करने का आदेश दिया। इसमें उन्हें सफलता भी मिली। दंगाई वहां से भागे। जिसके बाद पुलिस बल ने किसी तरह बंधक बने श्रद्धालुओं को वहां से मुक्त कराया। इससे स्पष्ट पता चलता है कि, ममता बनर्जी, जिन्हे पीड़ित बताकर उनके साथ खड़े होने का दावा कर रहीं हैं, असल में हमलावर उसी पक्ष से थे, वहीं जो असल में पीड़ित थे, उनको सांत्वना देने वाला तो कोई है ही नहीं। यही है वोट पॉलिटिक्स, जहाँ एकमुश्त वोट करने वालों को हर पार्टी अपनी तरफ रखना चाहती है, ताकि चुनावों में उसकी फसल काट सके। फिर चाहे इसके लिए तथ्यों को, सच्चाई को, लोगों के हित को और राष्ट्र की सुरक्षा के साथ कैसा भी खिलवाड़ क्यों न करना पड़े ?

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