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5 सालों में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए 655 अपराधी, हैरान कर देगा यूपी का आंकड़ा
5 सालों में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए 655 अपराधी, हैरान कर देगा यूपी का आंकड़ा

नई दिल्ली: देश में पुलिस एनकाउंटर में होने वाली मौतों पर अक्सर सवाल खड़े होते रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों से विपक्षी दलों द्वारा ऐसा दावा किया जाता रहा है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर में सबसे अधिक मौतें हुईं हैं. किन्तु आंकड़े अलग बात कहते हैं. लोकसभा में भाजपा सांसद वरुण गांधी ने पुलिस एनकाउंटर में हुई मौतों को लेकर सवाल पुछा था. जिसके बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसका आंकड़ों सहित जवाब दिया. 

उन्होंने बताया है कि 5 वर्षों में देश में पुलिस एनकाउंटर में 655 अपराधियों की मौत हुई हैं. ये आंकड़ा 1 जनवरी 2017 से 31 जनवरी 2022 तक का है. सरकार ने बताया है कि 5 वर्षों में देश में पुलिस मुठभेड़ में सर्वाधिक मौतें छत्तीसगढ़ में हुई हैं. वहां 191 लोग मारे गए हैं. दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश का नाम है, जहां 117 अपराधियों का एनकाउंटर किया गया है. बता दें कि संविधान में कहीं भी एनकाउंटर का उल्लेख नहीं है. कानून में एनकाउंटर को जायज़ ठहराने का भी प्रावधान नहीं है, मगर कुछ ऐसे नियम अवश्य हैं, जो पुलिस को अपराधियों पर हमला करने और इस दौरान अपराधी की मौत को जायज़ ठहराने का अधिकार देते हैं.

CRPC की धारा 46 के अनुसार, यदि कोई अपराधी अपने आप को गिरफ्तारी से बचाने का प्रयास करता है या पुलिस की गिरफ्त से भागने का प्रयास करता है या फिर पुलिस पर हमला करता है तो ऐसे हालात में पुलिस भी जवाबी कार्रवाई कर सकती है. पुलिस एनकाउंटर या गोलीबारी में हुई मौत की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ गाइडलाइंस निर्धारित कर रखी हैं. इसके अनुसार, ऐसे मामले में फ़ौरन FIR दर्ज होनी चाहिए और इसकी जांच CID या दूसरे पुलिस स्टेशन की टीम से करवाना अनिवार्य है. शीर्ष अदालत की गाइडलाइन के अनुसार, पुलिस गोलीबारी में हुई हर मौत की मजिस्ट्रियल जांच होनी चाहिए. ऐसे मामलों की सूचना बगैर देर किए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राज्य मानवाधिकार आयोग को देना आवश्यक है.

इसके साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भी कुछ दिशानिर्देश भी हैं. इनमें कहा गया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई मौत की सूचना 48 घंटे के अंदर आयोग को देना आवश्यक है. इसके तीन माह बाद एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करना होगा. ये भी कहा गया है कि यदि जांच में पुलिस दोषी पाई जाती है तो मारे गए व्यक्ति के परिजनों को मुआवजा प्रदान करना होगा.

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