ऑर्गेनिक पैड बना रही है 18 साल की यह लड़की, खासियत जानकर खुश हो जाएंगे आप

हम सभी इस बात से वाकिफ हैं कि भारत में माहवारी (पीरियड्स) को आज भी लोग शर्म की बात मानते है लेकिन बीते कुछ सालों में पीरियड्स को लेकर लोगों का नज़रिया भी बदल रहा है. जी हाँ, आज के समय में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान सस्ते और इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड भी मिल जाते हैं. वहीं हाल ही में कोयंबटूर की रहने वाली इशाना ने इसकी पहल की है. जी हाँ, असुविधाजनक और सिंथेटिक कपड़ों से बने पैड इस्तेमाल करने से वातावरण को हो रहे नुकसान को देखकर इशाना ने ख़ुद ही इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड की पहल शुरू की है. जी हाँ, दरअसल यह पैड इको-फ्रेंडली होने के साथ-साथ रुई के बने होंगे.

जी हाँ, इशाना कोयंबटूर में एक छोटी सी दुकान में 20 अन्य महिलाओं की मदद से इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड बना रही हैं और इन सभी के बीच ख़ास बात यह है कि ये सभी महिलाएं महीने का करीब 5,000 कमा लेती हैं.जी हाँ, आपको बता दें कि इशाना ने अपनी पढ़ाई ख़त्म करने के बाद छः महीने का फ़ैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया और कोर्स ख़त्म होने के बाद उन्होंने किसी बड़े ब्रांड के साथ काम करने के बजाय ग़रीब व ज़रूरतमंद महिलाओं के लिए काम करने का फ़ैसला किया.

वहीं इशाना के बनाए हुए इन पैड्स की सबसे ख़ास बात ये है कि अन्य हानिकारक पैड्स के मुक़ाबले ये Biodegradable पैड्स रुई की कई परतों से बने हैं और यह पैड्स महिलाओं व वातावरण दोनों के लिए सुरक्षित बने हैं. हम जानते हैं सिंथेटिक पैड्स को Decompose होने में सालभर लग जाते हैं लेकिन यह पैड्स 6 दिन में ही Decompose हो जाते हैं. इशाना यह दावा भी कर चुकीं हैं कि यदि महिलाऐं ये पैड इस्तेमाल करती हैं तो उन्हें साल में सिर्फ़ 6 से 7 पैड्स की ही आवश्यकता होगी. इशाना ने बताया है कि इन पैड्स को बनाने में 15 से 20 मिनट लग जाते हैं और वह एक साथ 60-70 पैड्स बनवाने के लिए स्थानीय दर्जी को 400 रुपये भी देती हैं.

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