केरल नन रेप केस: आरोपित बिशप की मुश्किलें बढ़ीं, अदालत ने ठुकराई जमानत की अर्जी

कोच्ची: केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को पूर्व जलंधर बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत याचिका खारिज कर दी. वरिष्ठ कैथोलिक पुजारी को 2014 और 2016 के बीच बार-बार नन के साथ बलात्कार करने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें तीन दिन की पूछताछ के बाद 21 सितंबर को त्रिपुनीथुरा से गिरफ्तार किया गया था, हालांकि पादरी ने यौन दुर्व्यवहार के आरोपों से इंकार कर दिया है. 22 सितंबर को, केरल के कोट्टायम में पाल न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने पेश होने के बाद, मुलक्कल को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था, जिसके बाद 24 सितंबर को उन्हें उसी अदालत द्वारा 6 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

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वहीं इस मामले मे कथित पीड़ित की बहन ने राज्य पुलिस में एक रिपोर्ट दायर की और दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, इसलिए पीड़िता की बहन ने सरकार से सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है. गौरतलब है कि जलंधर बिशप के प्रभारी मुलक्कल को पोप फ्रांसिस द्वारा अस्थायी रूप से अपने पादरी कर्तव्यों से मुक्त किया गया था, क्योंकि पूर्व बिशप ने पोप को पत्र लिखकर कर्तव्यों से मुक्त करने कि बात कही थी, ताकि वे पुलिस को पूछताछ के लिए समय दे सकें. 

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इससे पहले जलंधर के मिशनरी ऑफ जीसस से 15 नन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बिशप की गिरफ्तारी पर दिल्ली में केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी  विजयन से मुलाकात की थी. बैठक के बाद, मिशनरी ऑफ जीसस के बहन अमला ने दावा किया था कि मुलक्कल को मामले में गलत तरीके से उलझाया गया है और पुलिस की जांच भी पक्षपातपूर्ण है. वहीं दूसरी ओर, केरल में बिशप के खिलाफ कई प्रीस्ट और नन विरोध कर रहे हैं, आपको बता दें कि मामले सामने आने के तुरंत बाद, कार्यकर्ताओं ने उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए त्रिवेंद्रम के केरल सचिवालय के बाहर एक विरोध प्रदर्शन किया था.

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