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विवादों में संसद की कैंटीन,सांसदों को सब्सिडी पर न दे खाना
विवादों में संसद की कैंटीन,सांसदों को सब्सिडी पर न दे खाना

नई दिल्ली : संसद में सांसदों के लिए बहुत ही सस्ती दर पर भोजन सुविधा उपलब्ध है लेकिन इसके लिए सरकार को बड़े पैमाने पर सब्सिडी चुकानी पड़ती है। जिसे लेकर हाल ही में एक सूचना के अधिकार कार्यकर्ता ने प्रश्न उठाए हैं और कहा है कि संसद परिसर में संचालित कैंटिन को बीते 5 वर्ष के अंतर्गत 60.7 करोड़ रूपए की सब्सिडी प्रदान की गई थी। यह सब्सिडी का बड़ा प्रतिशत है। इसे बचाकर समर्थ सांसदों के लिए वास्तविक मूल्य पर ही भोजन उपलब्ध होना चाहिए। हाल ही में कहा गया है कि संसद परिसर में जो कैंटिन संचालित हो रही है उसमें सांसदों को काफी रिजनेबल रेट में भोजन मिलता है।

मगर इनकी आमदनी तो करीब 1.4 लाख रूपए होती है लेकिन अधिक आमदनी वाले सांसदों के लिए स्वादिष्ट फ्राईड फिश और चिप्स के 25 रूपए, और मटन कटलेट केवल अठारह रूपए में मिलता है। यही नहीं सब्जियां तो महज 5 रूपए में मिलती है और सांसद हर रोज़ मटन करी भी खा सकते हैं। तो इसका अर्थ यही है कि यदि आपको कभी भी इन सभी पकवानों का स्वाद चखना हो तो पहले किसी सांसद से दोस्ती कर लीजिए, बस आपका काम बहुत आसान हो जाएगा।

मामले में RTI कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल द्वारा कहा गया है कि मांसाहारी व्यंजन के लिए यहां से कच्चा सामान भी खरीदा जा सकता है जो कि यहां महज 99.5 रूपए में मिल जाता है। दरअसल इन कैंटीनों के लिए सामान केंद्रीय भंडार, मदर डेयरी के साथ DMS से भेजा जाता है। मामले में कहा गया है कि संसद भवन एनेक्सी द्वारा संसद भवन के स्वागत कक्ष में और संसद भवन लाइब्रेरी में भी दिया गया है।

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